लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
नागौर (प्रदीप कुमार डागा)। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जुगल किशोर सैनी के निर्देशानुसार जिला कारागृह नागौर में एआई आधारित अल्ट्रा पोर्टेबल हैंड-हेल्ड एक्स-रे मशीन (A-BES) के माध्यम से कैदियों की टीबी जांच के लिए विशेष शिविर आयोजित किया गया।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. श्रवण राव और रेडियोग्राफर देवाशीष आचार्य ने बताया कि यह मशीन कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तकनीक पर आधारित है। यह एक्स-रे इमेज का तुरंत विश्लेषण कर संभावित टीबी के लक्षणों की पहचान करती है, जिससे संदिग्ध मरीजों की समय पर पहचान और उपचार संभव हो पाता है। हल्की और पोर्टेबल होने के कारण मशीन को आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जा सकता है, और जांच के तुरंत बाद डिजिटल रिपोर्ट उपलब्ध हो जाती है।
शिविर में डॉ. विक्रम बाजिया ने कैदियों का परीक्षण कर उचित परामर्श दिया और संभावित टीबी रोगियों को बलगम जांच के लिए रेफर किया। उन्होंने जांच प्रक्रिया और समय पर जांच के महत्व पर भी प्रकाश डाला। जिला टीबी-एचआईवी समन्वयक सुनील हर्ष ने मरीजों का रजिस्ट्रेशन किया और कैदियों को टीबी के लक्षण, बचाव और उपचार के बारे में विस्तृत जानकारी दी। जेल डिस्पेंसरी के डॉ. कन्हैयालाल पवार ने इलाज और नियमित दवा लेने की आवश्यकता पर जोर दिया।
रेडियोग्राफर देवाशीष आचार्य और देवकिशन सांखला ने एआई आधारित हैंड-हेल्ड मशीन से कैदियों के एक्स-रे किए। इस अवसर पर घनश्याम सहित अन्य स्टाफ भी उपस्थित रहे।
अधिकारियों ने बताया कि “टीबी मुक्त भारत अभियान” के तहत वर्ष 2025 तक देश से टीबी उन्मूलन का लक्ष्य रखा गया है। इस अभियान में समय पर जांच, नि:शुल्क उपचार, पोषण सहायता और जन-जागरूकता पर विशेष जोर दिया जा रहा है। एआई आधारित पोर्टेबल एक्स-रे मशीन जैसी आधुनिक तकनीक के उपयोग से दूरस्थ और विशेष स्थानों पर भी स्क्रीनिंग आसान हो रही है, जिससे अधिक से अधिक लोगों तक शीघ्र उपचार पहुंचाकर समाज को टीबी मुक्त बनाने में मदद मिलेगी।
















































