लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
चार ग्राम पंचायतों के एक दर्जन गांवों में उबाल, सरकार की चुप्पी से बढ़ा जनाक्रोश
सिरोही। सिरोही जिले की चार ग्राम पंचायतों के अंतर्गत आने वाले करीब एक दर्जन गांवों में मेसर्स कमलेश मेटाकास्ट प्राइवेट लिमिटेड की प्रस्तावित खनन परियोजना के खिलाफ चल रहा जनआंदोलन अब निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है। लगभग चार महीनों से जारी विरोध के बाद क्षेत्रवासियों ने 28 जनवरी से अनिश्चितकालीन महाआंदोलन शुरू करने की घोषणा की है। इसे लेकर गांव-गांव बैठकों, जनसंपर्क और रणनीति निर्माण का सिलसिला तेज हो गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह खनन परियोजना पर्यावरण, खेती, जल स्रोतों, चारागाह और ग्रामीण जीवन व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है। इसके बावजूद सरकार और प्रशासन की चुप्पी से लोगों में गहरा आक्रोश है।
चार महीने से जारी जनसंघर्ष
खनन परियोजना के खिलाफ आंदोलन की शुरुआत भीमाना गांव से हुई थी, जहां हजारों ग्रामीणों ने धरना दिया। इसके बाद पिंडवाड़ा उपखंड कार्यालय का ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ घेराव किया गया। तब से लेकर अब तक क्षेत्र के विभिन्न गांवों में धरने, जनसभाएं और विरोध प्रदर्शन लगातार जारी हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह किसी एक गांव का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है।
जनता को बिना जानकारी दिए आगे बढ़ी परियोजना
ग्रामीणों का आरोप है कि खनन परियोजना को जनता को अंधेरे में रखकर आगे बढ़ाया गया। उन्हें इसकी जानकारी तब मिली जब 19 सितंबर 2025 को भीमाना ग्राम पंचायत में पर्यावरण स्वीकृति के लिए जनसुनवाई आयोजित की गई। इससे पहले न ग्राम सभाओं में चर्चा हुई और न ही ग्रामीणों की सहमति ली गई।
800 हेक्टेयर से अधिक भूमि खनन के लिए प्रस्तावित
प्रस्तावित खनन क्षेत्र का कुल रकबा 800.9935 हेक्टेयर है, जिसमें शामिल हैं:
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निजी खातेदारी भूमि – 551.9535 हेक्टेयर
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सरकारी भूमि – 227.95 हेक्टेयर
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चरागाह भूमि – 21.09 हेक्टेयर
ग्रामीणों का कहना है कि अधिकांश भूमि उपजाऊ और सिंचित है, लेकिन कंपनी के दस्तावेजों में इसे असिंचित बताया गया है।
जनसुनवाई में विरोध, बाद में सामने आए सहमति पत्र
ग्रामीणों के अनुसार जनसुनवाई के दौरान कंपनी के पक्ष में एक भी सहमति पत्र प्रस्तुत नहीं किया गया था, जबकि 100 से अधिक लिखित आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। बाद में सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेजों में कई सहमति पत्र सामने आए, जिन पर फर्जी हस्ताक्षर होने का आरोप है। इस संबंध में रोहिड़ा और स्वरूपगंज थानों में शिकायतें दी गईं, लेकिन अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई।
राजनीतिक दबाव में कार्रवाई न होने का आरोप
आंदोलनकारियों का आरोप है कि पुलिस और प्रशासन राजनीतिक दबाव में काम कर रहे हैं। फर्जी दस्तावेजों पर कार्रवाई नहीं होना और आंदोलनकारियों को परेशान किया जाना लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया जा रहा है।
28 जनवरी से पहले वाहन रैली
महाआंदोलन से पूर्व जनसमर्थन जुटाने के लिए गांव-गांव वाहन रैली निकाली जाएगी। इसके जरिए लोगों को खनन परियोजना के संभावित दुष्प्रभावों से अवगत कराया जाएगा।
नोटिस देकर दबाव बनाने का आरोप
आंदोलन की घोषणा के बाद प्रशासन द्वारा वाटेरा गांव में 37 परिवारों को भू-राजस्व अधिनियम के तहत अतिक्रमण नोटिस जारी किए गए। ग्रामीणों का कहना है कि ये मकान दशकों पुराने, पट्टासुदा और रजिस्ट्रीशुदा हैं, जिनमें बिजली-पानी कनेक्शन और सड़कें मौजूद हैं।
किसी भी कीमत पर परियोजना नहीं होने देंगे
आंदोलनकारियों ने साफ कहा है कि वे किसी भी हाल में इस खनन परियोजना को लागू नहीं होने देंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जनभावनाओं की अनदेखी की, तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी।
प्रेस वार्ता में ये रहे मौजूद
प्रेस वार्ता में लाल सिंह रायका (राष्ट्रीय पशुपालक संघ), अमित त्रिवेदी, एडवोकेट सुरेश राजपुरोहित, एडवोकेट तुषार पुरोहित, एडवोकेट हार्दिक रावल, रमेश घांची, पदमाराम घांची, गजाराम घांची, भरत सराधना, सवाराम देवासी सहित अनेक सामाजिक व किसान संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।










































