लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
जयपुर | राजस्थान सरकार की ‘मुख्यमंत्री कन्यादान योजना’ गरीब और बेसहारा परिवारों की बेटियों के लिए आर्थिक और सामाजिक संबल का माध्यम बन गई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में संचालित यह योजना बेटियों के विवाह और शिक्षा को प्रोत्साहित करते हुए उनकी खुशियों का आधार बन रही है।
वर्ष 2023-24 से अब तक इस योजना के तहत 34,704 कन्याओं को लाभ दिया गया है, जिसमें लगभग 142.62 करोड़ रुपए का व्यय हुआ है।
प्रोत्साहन राशि से बढ़ता आर्थिक संबल
योजना की सबसे खास बात यह है कि यह बालिकाओं की शिक्षा और विवाह को सीधे जोड़ती है।
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अनुसूचित जाति, जनजाति और अल्पसंख्यक बीपीएल परिवार की कन्याओं को विवाह पर 31,000 रुपए
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अन्य बीपीएल, अंत्योदय, विधवा, विशेष योग्यजन या महिला खिलाड़ी कन्याओं को 21,000 रुपए
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शैक्षणिक प्रोत्साहन: 10वीं पास पर 10,000 रुपए, स्नातक पास पर 20,000 रुपए
इस तरह बेटी की शिक्षा और विवाह दोनों में आर्थिक सहायता सुनिश्चित की गई है।
सहज और पारदर्शी आवेदन प्रक्रिया
योजना का लाभ लेने के लिए:
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कन्या की आयु 18 वर्ष या अधिक
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प्रत्येक परिवार अधिकतम दो कन्याओं के लिए आवेदन कर सकता है
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आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन: एसएसओ आईडी के माध्यम से एसजेएमएस पोर्टल या ई-मित्र
लाभार्थी का बैंक खाता सीधे DBT के माध्यम से जोड़ा गया है। आवेदन विवाह की तारीख से एक वर्ष तक किया जा सकता है।

इतिहास और विस्तार
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1997-98: विधवा महिलाओं की पुत्रियों के विवाह अनुदान से शुरू
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2005: अनुसूचित जाति-जनजाति बीपीएल परिवार शामिल
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2016-17: ‘सहयोग एवं उपहार योजना’
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2020: वर्तमान रूप में ‘मुख्यमंत्री कन्यादान योजना’
जन-आधार से सशक्त डिजिटल सुशासन
राज्य सरकार ने योजना को जन-आधार पोर्टल से एकीकृत किया है।
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आवेदन में मूल निवास, जाति, बीपीएल/अंत्योदय कार्ड, आय प्रमाण, विवाह पंजीयन और बैंक खाता विवरण स्वतः वेरिफाई
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इससे समय की बचत, कागजी कार्रवाई और मानवीय हस्तक्षेप न्यूनतम
समाज में सकारात्मक बदलाव
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में यह योजना न केवल आर्थिक सहायता, बल्कि बेटियों के सशक्तिकरण, शिक्षा और गर्वपूर्ण जीवन प्रारंभ का माध्यम बन गई है। आज राजस्थान की बेटियां पढ़ाई के साथ-साथ नए जीवन की शुरुआत भी आत्मविश्वास और सम्मान के साथ कर रही हैं।











































