लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
रितु मेहरा
कलियुग में भी हमारे सनातन धर्मावलंबियों में बजरंगबली का क्रेज बरकरार है । चाहे हमारी युवा पीढ़ी हो ,या हमारे वरिष्ठ जन, दादा- दादी , या नाना- नानी, भाई -भाभी हो, या बच्चे, युवक कोई भी हो यदि वह हिंदू धर्मावलंबी है, जो सनातन धर्म को मानते हैं उनका संकट के समय बजरंगबली के प्रति विश्वास अधिक नजर आता है। यही कारण है कि अनादि काल से हमारे पूर्वज हनुमान जी महाराज यानी बजरंगबली का की पूजा अर्चना करते रहे हैं। तो वर्तमान में हमारी युवा पीढ़ी बजरंगबली के प्रति ज्यादा विश्वास करती नजर आती है । बजरंगबली के प्रति युवाओं में लगातार बढ़ रहे आस्था के कारण मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान जी के मंदिरों में ज्यादा भीड़ रहने लगी है।

मंगलवार को हनुमान जी की पूजा क्यों की जाती है?
भारत में मंगलवार का दिन विशेष रूप से श्री हनुमान जी को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन हनुमान जी की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन से संकट, भय, नकारात्मक शक्तियाँ और शारीरिक कष्ट दूर होते हैं। हनुमान जी शक्ति, साहस और भक्ति के प्रतीक हैं, और मंगलवार को उनकी पूजा करने से अद्भुत आत्मबल और ऊर्जा प्राप्त होती है।
हनुमान जी की पूजा करने से क्या लाभ होते हैं?
जीवन की कठिनाइयों और बाधाओं का नाश होता है।
भूत-प्रेत बाधाओं से रक्षा मिलती है।
मानसिक तनाव और भय दूर होते हैं, आत्मविश्वास बढ़ता है।
जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शक्ति का संचार होता है।
आर्थिक समस्याओं में भी राहत मिलने की मान्यता है।
हनुमान जी की पूजा कैसे करें?
1. प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
2. हनुमान जी की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक और अगरबत्ती जलाएँ।
3. लाल पुष्प, सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाएँ।
4. “ॐ हनुमते नमः” या “हनुमान चालीसा” का पाठ करें।
5. मंगलवार के दिन व्रत भी रखा जा सकता है; भोजन में नमक का त्याग कर फलाहार करें।
6- हनुमान- बजरंग बाण के पाठ करें
7- नारियल, लड्डू पान, चना, चना मखना, रोट, प्रसाद के साथ में तुलसी जरूर चढ़ाते हैं इसके अलावा की सभी तरह के मिष्ठान का भोग बालाजी को लगाया जाता है
— पूजा के पीछे धारणा
धार्मिक मान्यता के अनुसार, हनुमान जी स्वयं अमर (चिरंजीवी) हैं और अपने भक्तों के हर संकट को हर लेते हैं। वे शक्ति और भक्ति का अद्भुत संगम हैं। मंगलवार को हनुमान जी की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में सच्ची भक्ति, साहस और सकारात्मक दृष्टिकोण का विकास होता है।
नोट यह है आपकी श्रद्धा पर निर्भर करता है कि आप किस देवी देवता को मानते हैं हम हमारी तरफ से आप पर कुछ थोपना नहीं चाहते, श्रद्धा अपनी-अपनी होती है आदमी किसको मन किसको नहीं माने वह उसकी मर्जी।