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विधायक और समर्थकों ने पहले पिटा और फिर थाने में कराया बंद- एईएएन- बैरवा

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

 

 श्रीगंगानगर में विधायक बनाम इंजीनियर विवाद ने पकड़ा तूल, एईएन ने लगाया विधायक और समर्थकों पर पिटाई के आरोप

राजस्थान के श्रीगंगानगर में बीजेपी विधायक जयदीप बिहाणी और AEN जगनलाल बैरवा के बीच विवाद ने अब बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक रूप ले लिया है।

मामला उस वक्त शुरू हुआ जब विधायक के जनसुनवाई कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर विवाद बढ़ गया। आरोप है कि विधायक ने पहले AEN और अन्य कर्मचारियों को सार्वजनिक रूप से धमकाया और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। विरोध करने पर स्थिति बिगड़ गई और मारपीट तक पहुंच गई।

AEN का गंभीर आरोप

रिहा होने के बाद AEN जगनलाल बैरवा ने चौंकाने वाले आरोप लगाए—

  • विधायक और उनके समर्थकों ने “विधायक सेवा केंद्र” में जमकर पिटाई की
  • उनके कपड़े फट गए और खून के निशान तक आ गए
  • बाद में उन्हें नई शर्ट पहनाकर पुलिस बुलाकर खुद पर हमला दिखाया गया
  • और फिर उल्टा उन्हें ही गिरफ्तार करवा दिया गया

बैरवा ने अपने शरीर पर चोटों के निशान भी दिखाए और पूरे मामले की मेडिकल बोर्ड से जांच की मांग की है। बैरवा का कहना है कि क्या कर्मचारी – अधिकारी कोई भी हो  एक जन प्रतिनिधि जो स्थानीय एमएलए की जनसुनवाई में जाकर उसके साथ मारपीट करने की हिम्मत कर सकता है? हमने सिर्फ जो विधायक महोदय गाली- गलौच कर रहे थे तब विरोध किया था, जिससे नाराज होकर उन्होंने हमारे साथ मारपीट की और फिर वहां मौजूद लोगों ने भी मारपीट की, जिसमें मेरा शर्ट फट गया। एमएलए ने बाजार से नई शर्ट मंगवाकर दी और पुलिस बुलाकर हमें गिरफ्तार करवा दिया।  क्योंकि हम विधायक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराते उससे पहले ही उसने हमारे खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज कर बंद करा दिया। पुलिस वाले भी पहले एमएएल की सुनते हमारी कैसे सुनते। आखिर ये अन्याय हुआ न हमारी पिटाई भी की, बेइज्जती भी कर दी और थाने में भी बंद करा दिया।

इंजीनियर्स का विरोध

इस घटना के बाद इंजीनियर्स एसोसिएशन ने विरोध प्रदर्शन किया और विधायक की गिरफ्तारी की मांग उठाई। मामला अब केवल व्यक्तिगत विवाद नहीं, बल्कि सिस्टम बनाम राजनीति की लड़ाई बनता जा रहा है।

विधायक पक्ष क्या कहता है?

विधायक पक्ष की ओर से अब तक अलग कहानी सामने आ रही है, जिसमें खुद विधायक के साथ मारपीट का आरोप लगाया गया है। हालांकि इस पर विधायक ने मीडियाकर्मियों को जो कहानी बताई की हमने कर्मचारियों को सबके सामने डांटा था लेकिन इससे नाराज कर्मचारियों ने उन पर हमला कर दिया। लेकिन क्या ऐसा हो सकता है कि जन सुनवाई में विधायक जनता के सामने डांटे , गाली गलौच करे और विरोध करने पर  उनकी पिटाई भी खा ले… ऐसा तो कोई छुटभैय्ये नेता के सामने भी नहीं हो सकता है। यहां भी ऐसा ही हुआ है विधायक ने रोब झाड़ने के लिए एईएएन  और अन्य अधिकारियों को डांटा, गाली- गलौच की और जब उन्होंने विरोध किया तो विधायक और अन्य मौजूद लोगों ने उनकी पिटाई कर दी। जब मामला उलटा पड़ता दिखा तो खुद के साथ मारपीट होने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कर तीन कर्मचारियों को थाने में बंद करा दिया।  अब थाने में उनके साथ क्या न्याय होगा। क्योंकि जनसुनवाई में लोग भी विधायक महोदय के पिटाई करने वाले भी समर्थक और खुद तो भला वो कैसे कहेंगे कि कर्मचारियों को हमने पीटा है। इसलिए निष्पक्ष जांच में ही इसका खुलासा हो सकेगा।

अब सबसे बड़ा सवाल

  • असली हमला किसने किया?
  • क्या सत्ता का दुरुपयोग हुआ?
  • या फिर पूरा मामला स्क्रिप्टेड था?

सच सामने तभी आएगा जब दोनों पक्षों की मेडिकल जांच निष्पक्ष तरीके से होगी और पूरी घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।

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