लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
गंगधार, झालावाड़ (सुनील निगम)। गंगधार कस्बे में वैशाख शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर नरसिंह जयंती श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई। गढ़ मोहल्ला स्थित श्री नृसिंह मंदिर परिसर में हर वर्ष की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा।
आस्था और विश्वास का पर्व
नरसिंह जयंती भगवान भगवान विष्णु के चौथे अवतार भगवान नरसिंह को समर्पित है। यह पर्व इस विश्वास का प्रतीक है कि जब-जब धरती पर अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान अपने भक्तों की रक्षा के लिए अवतार लेते हैं।
पौराणिक कथा
मान्यता के अनुसार कश्यप ऋषि और दिति के पुत्र हिरण्याक्ष और हिरण्यकश्यप अत्यंत शक्तिशाली थे। हिरण्याक्ष का वध भगवान विष्णु ने वराह अवतार में किया। इसके बाद हिरण्यकश्यप ने कठोर तपस्या कर ऐसा वरदान प्राप्त किया कि उसकी मृत्यु न मनुष्य से हो, न पशु से, न दिन में, न रात में, न घर के अंदर, न बाहर और न किसी हथियार से हो।
उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। जब हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद से भगवान के अस्तित्व पर सवाल उठाया और खंभे पर प्रहार किया, तब उसी खंभे से भगवान नरसिंह प्रकट हुए।
⚔️ अधर्म का अंत
भगवान नरसिंह ने संध्या समय, घर की दहलीज पर, अपने नाखूनों से हिरण्यकश्यप का वध कर दिया और इस प्रकार वरदान की सभी शर्तों को पूर्ण करते हुए अधर्म का अंत किया।
श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजन हुए, जिनमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया और भगवान नरसिंह के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।