लोक टुडे न्युज़ नेटवर्क
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अभिनव पहल से साकार हो रहा विकसित राजस्थान का सपना
जयपुर ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास” के मंत्र को आगे बढ़ाते हुए राजस्थान में समावेशी और सतत विकास की दिशा में नई उड़ान भरने का कार्य जारी है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल पर राज्य में गुरु गोलवलकर आकांक्षी ब्लॉक विकास योजना शुरू की गई है, जिससे प्रदेश के हर जिले का एक ब्लॉक विकसित ब्लॉक में तब्दील हो सके।
5 आकांक्षी जिलों में तेजी से विकास
केंद्र सरकार और नीति आयोग की ओर से वर्ष 2018 में शुरू किए गए आकांक्षी जिला कार्यक्रम (ADP) के तहत राजस्थान के 5 जिले – बारां, धौलपुर, जैसलमेर, करौली और सिरोही चुने गए थे।
इन जिलों में स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, कृषि, वित्तीय समावेशन और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
कार्य के आकलन हेतु 49 संकेतकों पर आधारित डेल्टा रैंकिंग तैयार की जाती है, जिसके आधार पर इन जिलों को अब तक कुल 56.81 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि प्राप्त हुई है।
27 आकांक्षी ब्लॉक में विकास की नई लहर
जिलों की सफलता को ब्लॉक स्तर तक पहुंचाने के लिए जनवरी 2023 में आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम शुरू किया गया।
राजस्थान के 27 ब्लॉकों — जैसे कि किशनगंज, बसेड़ी, नीमराना, फतेहगढ़, आबूरोड, सज्जनगढ़, कोटड़ी, खेरवाड़ा आदि — में स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, आधारभूत ढांचा और कौशल विकास पर फोकस किया जा रहा है।
गुरु गोलवलकर आकांक्षी ब्लॉक विकास योजना – समग्र विकास की दिशा में कदम
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 27 मार्च 2025 को योजना के दिशा-निर्देश जारी किए।
इस योजना के तहत प्रदेश के 41 ब्लॉकों में लक्षित विकास कार्य चल रहे हैं।
राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर समितियां बनाई गई हैं जो कार्यक्रमों की निगरानी और मूल्यांकन करेंगी।
वर्ष 2025-26 के राज्य बजट में योजना के लिए 75 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
हर ब्लॉक को 1.5 करोड़ रुपये की अनटाइड निधि दी जाएगी, जबकि सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले ब्लॉकों को क्रमशः 50, 35 और 25 लाख रुपये की पुरस्कार राशि मिलेगी।
खेरवाड़ा ब्लॉक बना राज्य के लिए उदाहरण
उदयपुर जिले का खेरवाड़ा ब्लॉक, जो जनजाति बहुल क्षेत्र है, पहले कुपोषण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों से जूझ रहा था।
आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद यहाँ संपूर्णता अभियान, एएनसी खोजो अभियान और स्वस्थ धरोहर शिविरों जैसी गतिविधियों से बड़ा बदलाव आया है।
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एएनसी पंजीकरण दर 2023 में 60% से बढ़कर 2025 में 90% हो गई।
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संस्थानिक प्रसव और कुपोषण में कमी दर्ज की गई।
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कंगारू मदर केयर लाउंज की स्थापना से कम वजन वाले शिशुओं की देखभाल में सुधार हुआ।
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“स्वच्छ ढाणी एप” से ब्लॉक में सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग 80% तक घटा और सफाई व्यवस्था डिजिटल रूप से सशक्त हुई।
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विशेष आवश्यकता वाले 134 बच्चों को सामान्य स्कूलों में पढ़ाई के लिए विशेष सुविधाएं दी गईं।
बेसलाइन डेटा और ब्लॉक रणनीति तैयार
सभी 41 चयनित ब्लॉकों — जैसे भिनाय, रामगढ़, सिणधरी, शाहबाद, मसूदा, बीकानेर, करौली, झुंझुनूं, खंडेला, पिंडवाड़ा, सादुलशहर आदि — में बेसलाइन डाटा संग्रहण और ब्लॉक विकास रणनीति का कार्य पूरा हो चुका है।
अब अगले चरण में इन ब्लॉकों में लक्षित परियोजनाओं के क्रियान्वयन की तैयारी चल रही है।
विकसित राजस्थान की ओर कदम
राजस्थान सरकार की यह पहल न केवल ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के समग्र विकास को सुनिश्चित कर रही है, बल्कि राज्य को “विकसित राजस्थान” के संकल्प की ओर मजबूती से अग्रसर कर रही है।