लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
गिरल लिग्नाइट माइंस आंदोलन का 17वां दिन
बाड़मेर- बाड़मेर जिले के गिरल लिग्नाइट माइंस में स्थानीय श्रमिकों, ड्राइवरों और ग्रामीणों का आंदोलन अब लगातार 40 दिनों से अधिक समय से जारी है। वहीं शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी का धरना भी 17वें दिन में प्रवेश कर चुका है। भीषण गर्मी, कठिन परिस्थितियों और लगातार जारी संघर्ष के बावजूद विधायक भाटी लगातार धरनास्थल पर डटे हुए हैं और श्रमिकों के साथ मिलकर आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं।
धरनास्थल पर लगातार बढ़ती भीड़ और प्रदेशभर से मिल रहे समर्थन के बीच अब यह आंदोलन केवल मजदूरों की मांगों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि स्थानीय अधिकारों, रोजगार सुरक्षा, श्रमिक सम्मान और प्रशासनिक जवाबदेही का बड़ा जनआंदोलन बनता जा रहा है।
“मांगें पूरी होने तक धरनास्थल नहीं छोड़ूंगा” — रविन्द्र सिंह भाटी
धरनास्थल को संबोधित करते हुए शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने कहा कि जब तक श्रमिकों और ग्रामीणों की वाजिब मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक वे आंदोलनकारियों के बीच ही डटे रहेंगे।
उन्होंने कहा,
“यह लड़ाई केवल मजदूरों की नौकरी की नहीं, बल्कि उनके सम्मान, अधिकार और भविष्य की लड़ाई है। पिछले 40 दिनों से मजदूर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर बैठे हैं, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिला। जब तक इन लोगों की मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक मैं भी धरनास्थल नहीं छोड़ूंगा।”
भाटी ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मजदूरों और स्थानीय लोगों की आवाज़ को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से क्षेत्र के श्रमिकों की समस्याओं को दबाया गया और उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया।
धरनास्थल से ही शुरू की जनसुनवाई
गिरल आंदोलन के बीच शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने अब धरनास्थल पर ही जनसुनवाई शुरू कर दी है। गुरुवार को बड़ी संख्या में क्षेत्र के लोग अपनी विभिन्न समस्याओं और मामलों को लेकर धरनास्थल पहुँचे, जहाँ विधायक भाटी ने आमजन की समस्याएँ सुनीं और संबंधित अधिकारियों से फोन पर बात कर समाधान के निर्देश दिए।
इस दौरान पानी, बिजली, सड़क, राजस्व, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, चिकित्सा और प्रशासनिक समस्याओं से जुड़े कई मामलों को लेकर ग्रामीणों ने अपनी शिकायतें रखीं।
जनसुनवाई के दौरान रविन्द्र सिंह भाटी ने कहा कि वे आंदोलन स्थल पर रहते हुए भी अपने विधायक होने के दायित्वों को पूरी गंभीरता के साथ निभाते रहेंगे।
उन्होंने कहा,
“जनता ने मुझे केवल विधानसभा में बैठने के लिए नहीं चुना, बल्कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए चुना है। मैं धरनास्थल पर हूं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि क्षेत्र की बाकी समस्याओं को नजरअंदाज किया जाएगा। मैं यहां रहते हुए भी अपने विधायक होने के सभी दायित्व पूरे करूंगा।”
धरनास्थल बना जनसमस्याओं का केंद्र
पिछले कुछ दिनों में गिरल धरनास्थल केवल आंदोलन का केंद्र नहीं बल्कि आमजन की समस्याओं को उठाने का प्रमुख स्थान बनता जा रहा है। लगातार ग्रामीणों, महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं का वहां पहुँचना जारी है।
कई लोग व्यक्तिगत समस्याओं, प्रशासनिक मामलों और स्थानीय मुद्दों को लेकर भी धरनास्थल पहुँच रहे हैं। विधायक भाटी द्वारा वहीं बैठकर लोगों की समस्याएँ सुनने से आमजन में अलग तरह का विश्वास और जुड़ाव दिखाई दे रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि पहली बार कोई जनप्रतिनिधि इतने लंबे समय तक लगातार उनके बीच बैठकर न केवल आंदोलन का नेतृत्व कर रहा है, बल्कि साथ ही रोजमर्रा की जनसमस्याओं को भी सुन रहा है।
लगातार बढ़ रहा जनसमर्थन
गिरल लिग्नाइट माइंस आंदोलन को लेकर पूरे बाड़मेर और आसपास के क्षेत्रों में लगातार चर्चा बनी हुई है। आंदोलन के समर्थन में विभिन्न सामाजिक संगठनों, युवाओं, किसान समूहों और मजदूर संगठनों का समर्थन लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है।
धरनास्थल पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग पहुँच रहे हैं। कई ग्रामीण परिवार आंदोलनकारियों के लिए भोजन, पानी और अन्य व्यवस्थाओं में सहयोग कर रहे हैं। महिलाओं और बुजुर्गों की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है।
क्या हैं आंदोलन की प्रमुख मांगें
धरनास्थल पर बैठे श्रमिकों और ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में —
* कंपनी द्वारा निकाले गए 100 से अधिक ड्राइवरों और श्रमिकों की पुनर्बहाली
* सभी कर्मचारियों के लिए 8 घंटे की ड्यूटी व्यवस्था लागू करना
* स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देना
* श्रमिकों को नियमानुसार वेतन, बोनस और अन्य सुविधाएँ उपलब्ध करवाना
* माइंस क्षेत्र में सुरक्षा मानकों और श्रम कानूनों का पालन सुनिश्चित करना
* स्थानीय ग्रामीणों की पर्यावरण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का समाधान