लोक टुडे न्युज़ नेटवर्क
जयपुर : राज्य सरकार आमजन को संवेदनशील, पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त सुशासन प्रदान करने के प्रति प्रतिबद्ध है। इसी दिशा में सरकारी कामकाज में लापरवाही, अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार के दोषियों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि अधिकारी-कर्मचारी शासन तंत्र की मुख्य धुरी हैं, जिनकी भूमिका जनकल्याणकारी योजनाओं को आमजन तक पहुंचाने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि कार्मिकों को राज्यहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ईमानदारी और समर्पण भाव से काम करना चाहिए, ताकि योजनाओं का लाभ अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुंचे।
20 माह में 210 अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई
राज्य सरकार ने पौने दो वर्ष के कार्यकाल में कुल 210 अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। इस दौरान, आपराधिक प्रकरणों में 66 अधिकारियों को निलंबित, 6 अधिकारियों को पदच्युत और 9 अधिकारियों के विरुद्ध आजीवन 100% पेंशन रोकने की कार्रवाई की गई।
इसके साथ ही, सरकारी सेवाओं में ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा सुनिश्चित करने के लिए 98 अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृत की गई। साथ ही, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 2018 की धारा 17ए के तहत कुल 31 प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण भी किया गया।
राज्य सरकार का यह कदम एक स्पष्ट संदेश देता है कि सरकारी कामकाज में अनुशासन, ईमानदारी और जनहित सर्वोपरि हैं।