लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
पादूकलां के चारभुजानाथ और श्याम मंदिर में दिनभर धार्मिक आयोजन, निशान लेकर पहुंचे श्याम प्रेमी
पादूकलां। श्रावण मास की पुत्रदा एकादशी पर रविवार को पादूकलां कस्बे सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में श्रद्धा और भक्ति का माहौल देखने को मिला। कस्बे के श्री चारभुजानाथ मंदिर और बस्सी की ढाणी स्थित श्री श्याम मंदिर में दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। ब्रह्ममुहूर्त से ही श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए मंदिर पहुंचने लगे। दिनभर चले धार्मिक आयोजनों के बाद देर शाम हुई महाआरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
चारभुजानाथ मंदिर में महिलाओं ने लगाईं 108 परिक्रमा
श्री चारभुजानाथ मंदिर में महिलाओं ने पुत्रदा एकादशी का व्रत रखकर भगवान चारभुजानाथ की विधिवत पूजा-अर्चना की। इस दौरान महिलाओं ने मंदिर परिसर में 108 परिक्रमा लगाई और भगवान को नारियल अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य एवं खुशहाली की कामना की।
मंदिर परिसर में दिनभर भजन-कीर्तन और संकीर्तन का दौर चलता रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और धार्मिक आयोजनों में भाग लिया।
निशान लेकर श्याम मंदिर पहुंचे श्रद्धालु
बस्सी की ढाणी स्थित श्री श्याम मंदिर में बाबा श्याम का विशेष श्रृंगार किया गया। आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्याम प्रेमी हाथों में निशान लेकर पैदल मंदिर पहुंचे। श्रद्धालु ‘जय श्री श्याम’ के जयकारे लगाते हुए मंदिर पहुंचे।
मंदिर कमेटी की ओर से निशान लेकर पहुंचे श्रद्धालुओं का दुपट्टा पहनाकर स्वागत किया गया। श्रद्धालुओं ने बाबा श्याम की चौखट पर धोक लगाकर परिवार के साथ-साथ देश और प्रदेश की खुशहाली की कामना की।
दिनभर भजन-कीर्तन, महाआरती में उमड़ी भीड़
पुत्रदा एकादशी के अवसर पर दोनों मंदिरों में दिनभर धार्मिक आयोजनों का सिलसिला चलता रहा। महिलाओं और श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन के माध्यम से भगवान की आराधना की।
शाम को मंदिरों में विशेष महाआरती आयोजित की गई। आरती के दौरान मंदिर परिसर भगवान के जयकारों से गूंज उठा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने महाआरती में भाग लेकर प्रसाद ग्रहण किया।
पुत्रदा एकादशी के व्रत का विशेष महत्व
श्री श्याम मंदिर के पुजारी पुखराज शास्त्री ने बताया कि एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है। श्रावण मास की पुत्रदा एकादशी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा एवं व्रत का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार इस व्रत से संतान के सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन भगवान को पीले फूल, फल और पंचामृत अर्पित करने की परंपरा है। श्रद्धालु व्रत एवं पूजा-अर्चना कर पुण्य फल और परिवार में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।