लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
डग में गुरु-शिष्य परंपरा का अनूठा आयोजन, गुरुजनों के प्रति व्यक्त की श्रद्धा और कृतज्ञता
डग (झालावाड़)। मां शारदे सांस्कृतिक मंच के तत्वावधान में डग नगर में “मेरे गुरुवर” थीम पर विशेष गुरु पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में गुरुजनों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने के साथ ही अमरनाथ यात्रा से लौटे श्रद्धालुओं का सम्मान कर उनका बहुमान किया गया। आयोजन के माध्यम से भारतीय संस्कृति, गुरु-शिष्य परंपरा एवं सनातन मूल्यों को सहेजने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम में प्रभुदास वैष्णव, नंदलाल शर्मा, मुश्ताक खान, कैलाशनाथ योगी, राजेंद्र कुमार जैन, प्रदीप बैरागी, अशोक जोशी एवं गोपाल व्यास सहित गुरुजनों का विधिवत पूजन किया गया। मां शारदे सांस्कृतिक मंच के अध्यक्ष किशोर सोनी एवं उनकी धर्मपत्नी ने गुरु चरण-पादुकाओं के समक्ष पुष्प, अक्षत, रोली, फल एवं शॉल अर्पित कर पूजा-अर्चना की तथा आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस अवसर पर राजेंद्र कुमार जैन ने गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च माना गया है। गुरु अपने ज्ञान, संस्कार और अनुभव से शिष्य को अज्ञानता से ज्ञान की ओर ले जाता है तथा उसके व्यक्तित्व का निर्माण करता है। उन्होंने कहा कि गुरु के बताए मार्ग पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धा और सम्मान है।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि गुरु पूजन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि अपने शिक्षक, मार्गदर्शक और आध्यात्मिक गुरु के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का माध्यम है। गुरु के आशीर्वाद से व्यक्ति जीवन में सफलता, संस्कार और सद्मार्ग प्राप्त करता है।
मां शारदे सांस्कृतिक मंच के अध्यक्ष किशोर सोनी ने कहा कि गुरुजनों का सम्मान भारतीय संस्कृति और संस्कारों का अभिन्न अंग है। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत, गुरु-शिष्य परंपरा और धार्मिक मूल्यों से जोड़ने का अवसर मिलता है। उन्होंने घोषणा की कि यह आयोजन अब प्रतिवर्ष आयोजित किया जाएगा।
कार्यक्रम में अमरनाथ यात्रा से लौटे श्रद्धालुओं का भी सम्मान किया गया। मंच के सदस्यों एवं उपस्थित लोगों ने उनका स्वागत कर शुभकामनाएं दीं। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धा, भक्ति और भारतीय संस्कृति की अनुपम झलक देखने को मिली।
कार्यक्रम में मां शारदे सांस्कृतिक मंच के पदाधिकारियों, सदस्यों एवं नगर के गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया तथा गुरुजनों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए भारतीय संस्कृति और संस्कारों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
