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लूनियावास में अतिक्रमण का मामला, जांच कमेटी ने की पीड़ितों की सुनवाई

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
— मालिकाना हक़ से जुड़े दस्तावेज दिखाने के निर्देश
नवीन कुमावत
किशनगढ़ रेनवाल। लूनियावास ग्राम पंचायत में दशकों से काबिज पट्टा धारक 49 परिवारों को अतिकर्मी घोषित कर हटाने के नोटिस जारी किए जाने के बाद ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उपखंड अधिकारी रेनवाल ने तहसीलदार कोमल यादव, बीडीओ सी.आर. मीणा, गिरदावर नारायण जाट और पटवारी सुभाष काजला की चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित की थी। कमेटी ने गुरुवार को रेनवाल तहसील कार्यालय में पीड़ित पक्ष की सुनवाई की और उनके बयान भी दर्ज किए। इसके साथ ही मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
गौरतलब है कि ग्रामीणों ने इसे राजनीतिक द्वेषता का परिणाम बताते हुए पांच मई 2025 को रेनवाल उपखंड कार्यालय पर पंचायत समिति सदस्य संघ प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र सिंह सुरपुरा के नेतृत्व में धरना प्रदर्शन किया था, जिसमें भाजपा मंडल पदाधिकारी, मंदिर पुजारी परिवार और सैकड़ो ग्रामीण शामिल हुए थे। प्रदर्शन के दौरान पीड़ितों ने उपखंड अधिकारी को मांग पत्र सौंपा था। जिसमें सरपंच पति रामपाल पर पद का दुरुपयोग कर भाजपा कार्यकर्ताओं और पुजारी परिवार को निशाना बनाने के आरोप लगाए गए थे। आरोप है कि सरपंच राधादेवी के पति रामपाल ने कांग्रेस पार्टी से पंचायत समिति का चुनाव लड़ा था, लेकिन हारने के बाद विरोधियों को परेशान करना शुरू कर दिया। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि बिना नोटिस और सुनवाई के उनके पक्के मकान, बिजली कनेक्शन और पूर्व पंचायत से मिले पट्टों को नजरअंदाज कर उन्हें अतिकर्मी घोषित किया गया। गौरतलब है कि राजस्थान उच्च न्यायालय ने भी चार मार्च 2024 को निष्पक्ष जांच के आदेश दिए थे, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।

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