Home latest हंसने से दरकती है दुख की दीवारें सम्मुख में हुआ कविता पाठ

हंसने से दरकती है दुख की दीवारें सम्मुख में हुआ कविता पाठ

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 लोक टुडे  न्यूज  नेटवर्क 
कविता पाठ का कांस्टीट्यूशन क्लब में आयोजन
जयपुर।. गीत, गजल और कविता पाठ के कार्यक्रम “सम्मुख” में रविवार को कविता पाठ किया गया। यह आयोजन कांस्टीट्यूशन क्लब में संपन्न हुआ।
जबलपुर से बाबुषा कोहली और शिमला से श्वेता मिश्रा इस कार्यक्रम में जयपुर पहुंची। इसी अवसर पर बाबुषा कोहली के हाल ही में प्रकाशित कविता संग्रह “सत्य मधुमक्खी का छत्ता है” और किशन प्रणय के उपन्यास “मालवा डायरी” का विमोचन भी किया गया। बाबुषा कोहली ने शिकारी आता है हमें जल में फंसना नहीं चाहिए फिर भी हम फंस गए हैं अदृश्य जाल में से कविता पाठ का आरंभ किया। कोहली ने मुझे एक सरल शब्द दो इतना सरल जिस पर पांव रखते ही रास्ता खुल जाए जिसे हवा में उछालो तो वह चिड़िया बन जाए और हंसने से दरकती है दुख की दीवारें हंसने से कपकपाती आती है पितरों की सत्ता हंसना भी एक क्रांतिकारी क्रिया है कविता पाठ से श्रोताओं को अपने साथ जोड़ा।
शिमला से आई श्वेता मिश्रा ने दुख का कोई रंग होता तो क्या होता है प्रतीक्षा को पेड़ किस रंग में रंगते उदासियां किस रंग में अपनी बात कहती टूट कर क्या हो जाता अपेक्षाओं का रंग और उपेक्षित पेड़ कहीं सुख जाते हैं अपेक्षित नदी कहीं बीच में ही खो जाती है अपेक्षित जमीनों में भर जाती है दुख की दरें अपेक्षित घरों में घर जाती है भटकती आत्माएं कविताओं से संवेदनाओं से स्पर्श करने वाला बनाया।
किशन प्रणय ने अपनी पुस्तक मालवा डायरी के अंश पढ़े और कविता पाठ भी किया। सरोज बीठू और भवानी सिंह राठौड़ ने भी अपनी कविताओं के अंश पढ़े।  इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार लोकेश कुमार साहिल, ईश्वर दत्त माथुर सहित कामना राजावत अभिलाषा पारीक, राव शिवपाल सिंह आदि उपस्थित रहे।
ग्रासरूट मीडिया फाउंडेशन के प्रमोद शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए बताया कि यह कार्यक्रम राजस्थान फोरम के सहयोग से आयोजित किया गया। कार्यक्रम का संचालन करते हुए आलोक आनंद ने  विनोद कुमार शुक्ल को याद किया।

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