लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
सालासर में फसल बीमा फर्जीवाड़ा!
जयपुर/चूरू। राजस्थान में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। सालासर में एसबीआई शाखा में कथित घोटाले को लेकर सालासर थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है।
मामले में परिवादी गोविंद सिंह राठौड़ पुत्र नवरत्न सिंह जाट निवासी सुजानगढ़ ने रिपोर्ट दर्ज कराते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।
क्या है पूरा मामला?
परिवादी के अनुसार, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों की फसलों का स्वैच्छिक बीमा किया जाता है। योजना के तहत रबी फसल का निर्धारित प्रतिशत प्रीमियम किसान द्वारा वहन किया जाता है, जबकि शेष राशि राज्य और केंद्र सरकार द्वारा संयुक्त रूप से बैंक खातों में जमा कराई जाती है। बीमा क्लेम का भुगतान भी बैंक खाते के माध्यम से किया जाता है।
आरोप है कि सालासर स्थित
State Bank of India
की शाखा में बड़े स्तर पर फर्जी बीमा किया गया।
शिकायत में कहा गया है कि शाखा प्रबंधक उमेश कुमार सारस्वत, बैंक कर्मचारी भागीरथ नायक और अन्य कर्मचारियों ने बीमा कंपनी
Agriculture Insurance Company of India Limited
के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर आपराधिक षड्यंत्र रचा।
फर्जी जमीनों का बीमा, करोड़ों का क्लेम!
रिपोर्ट के अनुसार:
71 किसानों के नाम से बीकानेर जिले की गजनेर तहसील की जमीनों का बीमा किया गया।
आरोप है कि जिन जमीनों का बीमा किया गया, वे जमीनें वास्तविक रूप से उपलब्ध ही नहीं थीं।
लगभग ₹13,51,000 प्रीमियम जमा कराया गया।
संभावित क्लेम राशि लगभग ₹9 करोड़ बताई जा रही है।
परिवादी ने आरोप लगाया है कि बैंक अधिकारियों और बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों की मिलीभगत से राजकोष को भारी नुकसान पहुंचाने की साजिश रची गई।
मंत्री ने पकड़ा था मामला
बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब राजस्थान के कृषि मंत्री
किरोड़ी लाल मीणा
ने सालासर स्थित एसबीआई शाखा में फसल बीमा से जुड़े दस्तावेजों की जांच के दौरान कथित अनियमितताओं को पकड़ा था।
इसके बाद यह मामला थाने तक पहुंचा और अब विधिवत एफआईआर दर्ज कर जांच की मांग की गई है।
आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग
परिवादी ने शाखा प्रबंधक उमेश कुमार सारस्वत, कर्मचारी भागीरथ नायक, अन्य बैंक कर्मचारियों और बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला करोड़ों रुपये के फसल बीमा घोटाले के रूप में सामने आ सकता है।
