लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
उनियारा से निर्मल गुप्ता
आस्था का प्राचीन धाम, 1100 वर्ष है पुराना मंदिर, महाशिवरात्रि एवं श्रावण में उमड़ती है श्रद्धा की धारा
उनियारा।उनियारा शहर में स्थित प्राचीन भुक्तेश्वर महादेव मंदिर नगर की धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है। सैंकड़ों वर्षों से यह मंदिर श्रद्धालुओं की भक्ति का केंद्र बना हुआ है और यहां स्थापित शिवलिंग को अत्यंत प्राचीन एवं स्वयंभू माना जाता है। बताया जाता है कि यह मंदिर करीब 1100 वर्ष पुराना है। बुजुर्गों के अनुसार मंदिर का निर्माण साधु संतों ने करवाया था। जनश्रुति है कि यहां शिवलिंग भूमि से स्वयं प्रकट हुआ था। इसके बाद इस मंदिर का निर्माण होने के बाद लोगों की आस्था बढ गई। कहा जाता है कि पूर्व में इस क्षेत्र में घना वन क्षेत्र था और साधु-संत यहां तपस्या किया करते थे। उसी तपोभूमि पर यह शिवधाम स्थापित हुआ। यह मंदिर तालाब के तट पर बसा हुआ है, तालाब में पानी भरा रहने के बाद मंदिर का सौंदर्यकरण बढ़ जाता हैं। वहीं अतिप्राचीन होने के कारण लोगों की श्रद्धा बनी रहती है।
शिवलिंग को अत्यंत चमत्कारी माना जाता है
वहीं मंदिर में विराजित शिवलिंग को अत्यंत चमत्कारी माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य पूर्ण होती है। सावन मास में प्रतिदिन जलाभिषेक और रुद्राभिषेक का क्रम चलता है।महाशिवरात्रि पर हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और मंदिर परिसर में मेले जैसा वातावरण बना रहता है। मंदिर पुजारी प्रभु लाल कुशवाह एवं गोवर्धन कुशवाह ने बताया कि भुक्तेश्वर महादेव मंदिर नगर की आस्था का केंद्र है। यहां वर्षों से अखंड पूजा-अर्चना हो रही है। श्रावण मास और महाशिवरात्रि पर विशेष आयोजन किए जाते हैं। भगवान शिव की कृपा से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। वहीं मंदिर की संरचना पारंपरिक राजस्थानी शैली में है। पत्थर से निर्मित गर्भगृह और प्राचीन स्थापत्य कला इसकी ऐतिहासिकता को दर्शाती है। समय-समय पर मंदिर का जीर्णोद्धार भी कराया गया है।
श्रावण मास में विशेष आयोजन
प्रतिदिन जलाभिषेक व रुद्राभिषेक एवं भजन-कीर्तन व संगीतमय सुंदरकांड किया जाता है। सोमवार को विशेष श्रृंगार व महाप्रसादी वितरण तथा महाशिवरात्रि पर विशेष रात्रि जागरण, चार प्रहर की पूजा की जाती है तथा श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहती है।
भुक्तेश्वर महादेव मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि उनियारा की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है। श्रावण मास और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ इसकी महत्ता को दर्शाती है।