लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
भागवत कथा में श्री कृष्णा बाल लीला का वर्णन सुन मंत्र मुक्त हुए श्रद्धालु, सजाई गोवर्धन पर्वत की झांकी
भीलवाडा। (पंकज पोरवाल) श्रीमद् भागवत गंगा के समान है। भागवत को संतों ने गंगा का रूप दिया है। संतो के श्रीमुख से निकली वाणी गंगा कहलाती है। एक भागीरथी गंगा है और एक सत्संग रूपी भागवत गंगा है। इन दोनों में सबसे तेज प्रवाह भागवत गंगा का है। हरिद्वार में जो भागीरथी गंगा बह रही है वह तन को पवित्र करती है। श्रीमद् भागवत गंगा मन को पवित्र करती है और गोविंद की प्राप्ति होती है। इसलिए सबसे ज्यादा महत्व भागवत गंगा का है। उक्त अमृत वचन सूर्य महल मे मंगरोप वाले काबरा परिवार के द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दौरान कथावाचक संत अर्जुन राम के द्वारा व्यक्त किये गये। श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन श्रद्धालुओं ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का रसपान किया। संत अर्जुन राम ने श्री कृष्ण बाललीला, माखन चोरी लीला, वेणु गीत गोवर्धन पूजा आदि प्रसंगो का वर्णन किया। कथा के दौरान छप्पन भोग व गोवर्धन पर्वत की झांकी सजाई गई।
