लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
बैलेट पेपर की मांग पर कांग्रेस से पूछा- क्या आप अपनी मांग वापस लेंगे? संसद के विशेष सत्र में हर मुद्दे पर बहस कराने को तैयार है NDA
जयपुर। केंद्रीय रेल एवं सूचना प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को जयपुर स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में प्रेस वार्ता कर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लगातार उन लोकतांत्रिक संस्थाओं पर प्रहार कर रही है, जिन्हें वर्षों की मेहनत, कानून, संसद और देश के 140 करोड़ नागरिकों के योगदान से मजबूत बनाया गया है। कांग्रेस को संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने में न कोई शर्म है और न ही कोई हिचक।
वैष्णव ने कहा कि भाजपा और एनडीए ने तय किया है कि कांग्रेस की इस राजनीति और उसके कथित षड्यंत्र को जनता के सामने उजागर किया जाएगा। उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस के विरोध पर सवाल उठाते हुए कहा कि सही मतदाता सूची लोकतंत्र की बुनियादी जरूरत है। इसी के आधार पर चुनाव होते हैं और नागरिक अपने मताधिकार का इस्तेमाल करते हैं।

1947 से चल रही प्रक्रिया पर अब सवाल क्यों?
रेल मंत्री ने कहा कि मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण कोई नई प्रक्रिया नहीं है। आजादी के बाद से कई बार यह प्रक्रिया अपनाई गई है और कांग्रेस की सरकारों के कार्यकाल में भी ऐसा होता रहा है। ऐसे में अब जब यही प्रक्रिया चल रही है तो कांग्रेस इसका विरोध किस आधार पर कर रही है? उन्होंने कहा कि अगर यह पहली बार हो रहा होता तो कांग्रेस के सवालों का अलग आधार हो सकता था, लेकिन वर्षों से चली आ रही संवैधानिक प्रक्रिया पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
चुनाव आयोग की व्यवस्था ने लोकतंत्र को किया मजबूत
वैष्णव ने चुनाव आयोग की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि चुनावी व्यवस्था में सुधार से पहले फर्जी मतदान, एक व्यक्ति के नाम पर कई वोट और बूथ कैप्चरिंग जैसी समस्याएं सामने आती थीं। चुनाव आयोग की मजबूत व्यवस्था ने इन पर अंकुश लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने सवाल किया कि पिछले 20-25 वर्षों में लोकतंत्र को मजबूत करने वाली चुनावी प्रक्रिया पर कांग्रेस आज किस आधार पर सवाल खड़े कर रही है?
कांग्रेस से पूछे चार सवाल
अश्विनी वैष्णव ने प्रेस वार्ता में कांग्रेस के सामने चार सवाल रखे। उन्होंने पूछा कि वर्षों से चली आ रही SIR प्रक्रिया का विरोध किस आधार पर किया जा रहा है? चुनाव आयोग की व्यवस्था को चुनौती देने का आधार क्या है? बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग करने वाली कांग्रेस क्या अपनी इस मांग को वापस लेगी? क्या कांग्रेस चाहती है कि भारत के नागरिक नहीं होने वाले लोगों और निर्धारित प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से हटाए जाने योग्य नामों को भी वोटर लिस्ट में बनाए रखा जाए?
विशेष सत्र में बहस के लिए तैयार है एनडीए
वैष्णव ने कांग्रेस को संसद में खुली बहस की चुनौती देते हुए कहा कि संसद देश की सबसे बड़ी पंचायत है और संविधान के तहत स्थापित संस्था है। देश और राजनीति से जुड़े हर महत्वपूर्ण विषय पर संसद में चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जिस मुद्दे पर बहस चाहती है, सरकार उस पर चर्चा कराने के लिए तैयार है। जरूरत पड़ने पर विशेष सत्र बुलाने से भी एनडीए पीछे नहीं हटेगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेता पहले भी कई बार बहस के दौरान सदन से बाहर चले जाते हैं और इस बार भी ऐसा ही करेंगे, क्योंकि उनके पास ठोस तथ्य और मुद्दे नहीं हैं। वैष्णव ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक प्रक्रियाओं को कमजोर करने की कोशिश देशहित में नहीं है।
इमरजेंसी का जिक्र कर कांग्रेस की नीयत पर उठाए सवाल
केंद्रीय मंत्री ने 1975 की इमरजेंसी का जिक्र करते हुए कांग्रेस के लोकतंत्र संबंधी दावों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का इतिहास संवैधानिक व्यवस्था के साथ टकराव का रहा है। उन्होंने कैबिनेट से स्वीकृत अध्यादेश को प्रेस क्लब में फाड़ने की घटना और नेशनल एडवाइजरी काउंसिल जैसी व्यवस्था का भी उल्लेख किया।
वैष्णव ने कहा कि कांग्रेस की वोट बैंक की राजनीति का दौर अब समाप्त हो चुका है। आज देश की जनता विकास की राजनीति चाहती है। भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में समृद्ध, सशक्त और विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसमें देश के 140 करोड़ नागरिकों की सामूहिक भागीदारी महत्वपूर्ण है।
प्रेस वार्ता के दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़, प्रदेश उपाध्यक्ष श्रवण सिंह बागड़ी, प्रदेश प्रवक्ता रामलाल शर्मा और उपाध्यक्ष मुकेश दाधीच भी मौजूद रहे।