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उत्तराखंड के जंगलों में भीषण आग के कारण वन्य संपदा को भारी नुकसान।

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देहरादून ।उत्तराखंड में गर्मियों का मौसम आते ही वनाग्नि का मुद्दा जोर पकड़ने लगता है। कुमाऊं और गढ़वाल के पहाड़ों में चीड़ के जंगलों में लगने वाली इस आग से केवल जंगल ही नहीं बल्कि इंसानी जीवन भी अस्त-व्यस्त हो जाता है। हर साल की तरह इस साल भी पर्वतीय क्षेत्रों में आग की घटनाएं रुकने की जगह बढ़ती जा रही है। आपको बता दे कि रानीखेत के पाखुड़ा, ताड़ीखेत के कई जंगलों के जलने के बाद अब द्वाराहाट के जंगल भी आग से धधक रहे हैं। जाड़ों में जंगल धधकता देख लोग भी हैरान हैं।

महिलाओं ने बमुश्किल आग पर काबू पाने का प्रयास किया लेकिन देर शाम तक आग पर काबू नहीं पाई जा सकी थी। जनपद अल्मोड़ा के प्रसिद्ध दूनागिरि मंदिर के पास का जंगल पांच दिन से धधक रहा है। आग से बांस के पेड़ों को खासा नुकसान पहुंचा है, लेकिन वन विभाग मौके पर नहीं पहुंच सका है। ग्रामीणों ने आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। उत्तराखंड में वनाग्नि की घटनाओं में अब तक तीन लोगों की मौत हो गई है।

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बीते गुरूवार को अल्मोड़ा के सोमेश्वर के स्यूनराकोट के जंगलों में लगी आग की चपेट में आने से एक नेपाली मजदूर की मौत हो गई थी। जबकि तीन मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। घायल तीन मजदूरों में से दो मजदूरों ने भी इलाज के दौरान दम तड़ दिया है। सरकार आग बुझाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है लेकिन हाथ पर काबू नहीं पाया जा सका

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