लोक टुडे न्युज़ नेटवर्क
उनियारा (सत्यप्रकाश मयंक)।
उपखंड क्षेत्र स्थित श्री 1008 मुनिसुव्रतनाथ दिगंबर जैन सुखोदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र पर अष्टान्हिका महापर्व का शुभारंभ श्रद्धा और भक्ति के साथ हुआ।
सुखोदय प्रबंध समिति के मंत्री बसंत जैन एवं सह-कोषाध्यक्ष मनोज जैन बनेठा ने बताया कि यह महापर्व जैन समाज का अत्यंत पवित्र एवं पुण्यदायी पर्व माना जाता है, जो वर्ष में तीन बार — कार्तिक, फाल्गुन और आषाढ़ मास में मनाया जाता है।
मंगल ध्वनि और अभिषेक से हुआ आरंभ
महापर्व के प्रथम दिन तीर्थ क्षेत्र पर प्रिंस शास्त्री देवांश के निर्देशन में प्रातःकाल मंगल ध्वनि के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
इसके बाद भगवान मुनिसुव्रतनाथ भगवान का अभिषेक, पांडुशिला पर शांतिधारा, नवदेवता पूजन, मूलनायक मुनिसुव्रतनाथ भगवान की पूजन, चौबीसी पूजन, पंचमेरु पूजन तथा नंद्वीश्वर दीप पूजन संपन्न हुए।
श्रद्धालुओं ने नियम, संयम और ध्यान साधना के साथ अष्टान्हिका पर्व के प्रथम दिन का व्रत धारण किया।
✨ आत्मा को निर्मल करने वाला पर्व
भक्तामर अनुष्ठान संयोजक हुकुमचंद शहरवाले एवं मनोज जैन बनेठा ने बताया कि अष्टान्हिका पर्व आत्मा को निर्मल करने वाला, पापों को क्षीण करने वाला और मोक्षमार्ग का स्मरण कराने वाला दिव्य अवसर है।
उन्होंने कहा कि इस शाश्वत पर्व के दौरान सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चारित्र की साधना करने से अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है।
दैनिक अनुष्ठान और सामूहिक आरती
सुखोदय अभिषेक मंडल एवं यात्रियों द्वारा प्रतिदिन विशेष अभिषेक, शांतिधारा, पूजन एवं सांयकालीन सामूहिक आरती व भक्तामर अनुष्ठान का आयोजन किया जाएगा।
समिति ने सभी श्रावक-श्राविकाओं से अधिक से अधिक संख्या में भाग लेकर अपने जीवन को धर्ममय और पुण्यशील बनाने का आग्रह किया।
महापर्व के अंत में सामूहिक आरती और दीपार्चना के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
