Home Chhattisgarh शिबू सोरेन का निधन, आदिवासी नेता, JMM के गुरुदेव चले गए

शिबू सोरेन का निधन, आदिवासी नेता, JMM के गुरुदेव चले गए

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लोक टुडे न्यूज नेटवर्क

शिबू सोरेन का निधन: झारखंड के तीन बार मुख्यमंत्री ,केंद्र में मंत्री रहे शिबू सोरेन का निधन

झारखंड / नई दिल्ली — झारखंड की राजनीतिक दुनिया में शोक की लहर है क्योंकि आदिवासी अधिकारों के अग्रदूत और झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक शिबू सोरेन (Shibu Soren) का आज सुबह दिल्ली में निधन हो गया। वे 81 वर्ष के थे। उनके निधन की पुष्टि बेटे और वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने की और कहा, “आज मैं शून्य हो गया हूं।”

शिबू सोरेन के निधन पर शोक

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ,पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, राहुल गांधी ,सोनिया गांधी ,प्रियंका गांधी, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ,सचिन पायलट, गोविंद सिंह डोटासरा ,टीकाराम जूली ने ट्वीट कर शोक व्यक्त किया है।
शिबू सोरेन का जीवन परिचय

जन्म और प्रारंभिक जीवन
शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944 को बर्मगढ़ (अब रामगढ़, झारखंड) में हुआ। वे संताल जनजाति से संबंध रखते थे और आदिवासी सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष से जुड़े रहे।

JMM की स्थापना और आदिवासी आंदोलन में भूमिका
1972–73 में उन्होंने बिनोद बिहारी महतो और A. K. रॉय के साथ मिलकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की स्थापना की, जिसका उद्देश्य आदिवासी भूमि और पहचान की रक्षा करना था। वे JMM के लंबे समय तक प्रमुख नेता रहे।

शिबू सोरेन का राजनीतिक सफर
वे तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री रहे (2005, 2008–09, 2009–10) और आठ बार लोकसभा सांसद भी रहे, साथ ही दो बार राज्यसभा सदस्य भी बने।

केंद्रीय मंत्री पद
उन्होंने केंद्रीय कोयला मंत्री के रूप में UPA सरकार में कार्य किया, हालांकि कुछ आपराधिक आरोपों के कारण उस पद सुनिस्चित नहीं रह पाया।

स्वास्थ्य एवं अस्पताल में उपचार
जून 2025 के अंत से उनकी तबियत गंभीर बनी रही। वे दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती थे, जहां किडनी संक्रमण और स्ट्रोक के बाद वे वेंटिलेटर पर थे।

राजनीतिक विरासत
शिबू सोरेन आदिवासी राजनीति के प्रतीक माने जाते थे। उन्होंने झारखंड राज्य की स्थापना में अहम भूमिका निभाई और आदिवासी पहचान और भूमि अधिकारों के लिए संघर्ष किया। JMM को विधानसभा और लोकसभा चुनावों में मजबूत आधार बनाने में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा।

: बेटे हेमंत सोरेन ने संभाली राजनीतिक विरासत
वर्तमान मुख्यमंत्री और JMM के अध्यक्ष हेमंत सोरेन उनके पुत्र हैं, जिन्होंने पिता की विरासत संभाली और पार्टी को आगे बढ़ाया है। उनका नेतृत्व आज भी मजबूत है। हालांकि एक बार उन्हें आपराधिक मामलों के चलते मुख्यमंत्री पद खोना पड़ा लेकिन दोबारा फिर चुनाव जीतकर वह मुख्यमंत्री बने वर्तमान में झारखंड के मुख्यमंत्री है कांग्रेस के सहयोग से।

देश भर में आदिवासियों में शोक की लहर

शिबू सोरेन ने झारखंड में मुख्यमंत्री बनकर देश पर के आदिवासियों में जागरूकता पैदा की उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद झारखंड में लगातार आदिवासी मुख्यमंत्री ही बनता जा रहा है आदिवासियों ने अपना रोल मॉडल समझते हैं इसलिए आदिवासियों में अपने नेता गुरु जी के निधन पर  शोक है।

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