लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
पादूकलां। कस्बे और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में रविवार को पापमोचनी एकादशी श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाई गई। इस अवसर पर क्षेत्र के प्रमुख मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी और दिनभर पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और भगवान के दर्शन का सिलसिला चलता रहा।
श्रद्धालुओं ने चारभुजानाथ, रघुनाथजी, श्याम बाबा, तिबारी वाले बालाजी, रानाबाई मंदिर, सूरजपुरीजी बाबा मंदिर, कल्याणजी मंदिर, श्रीनाथजी के आसन और केशवराय मंदिर में जाकर भगवान के दर्शन किए और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
महिलाओं ने पवित्र सरोवर में स्नान कर मंदिरों की सीढ़ियों की सफाई की, दीपक जलाए, पुष्प अर्पित किए और भगवान की विशेष पूजा-अर्चना की। इसके बाद महिलाओं ने भजन-कीर्तन करते हुए 108 परिक्रमा लगाकर प्रभु का गुणगान किया।
चारभुजानाथ मंदिर में पंडित हस्तीमल उपाध्याय ने भगवान की आकर्षक झांकी सजाई और श्रद्धालुओं को पापमोचनी एकादशी की कथा सुनाई। वहीं, कैलाशदास वैष्णव ने एकादशी व्रत के धार्मिक महत्व पर प्रकाश डाला।
बस्सी ढाणी स्थित श्री श्याम मंदिर में भी भारी श्रद्धालु मौजूद रहे। भक्तों ने बाबा श्याम का भव्य श्रृंगार किया और दिनभर भजन-कीर्तन में भाग लिया। शाम को महाआरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर बाबा श्याम के दरबार में परिवार, गांव और देश की खुशहाली की कामना की। पुजारी पुखराज शास्त्री ने श्रद्धालुओं को मोरपंख से आशीर्वाद दिया।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली पापमोचनी एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है। इस दिन व्रत रखने और कथा सुनने से पापों से मुक्ति और मनोकामनाओं की पूर्ति होने की मान्यता है।