लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
अजमेर मंडल आरपीएफ की मानवीय पहल:
नितिन मेहरा, अजमेर।
अजमेर। भारतीय रेलवे जहां देश की जीवनरेखा के रूप में जानी जाती है, वहीं संकट में फंसे और अपनों से बिछड़े मासूम बच्चों के लिए एक सुरक्षा कवच भी साबित हो रही है। उत्तर पश्चिम रेलवे के अजमेर मंडल में रेलवे सुरक्षा बल (RPF) द्वारा चलाया जा रहा ‘ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते’ इसी मानवीय पहल का जीवंत उदाहरण है।
मंडल सुरक्षा आयुक्त दीपक कुमार आजाद के निर्देशन में अजमेर मंडल की विभिन्न आरपीएफ चौकियों और थानों द्वारा वर्ष 2025 में अब तक कुल 235 बच्चों को रेलवे परिसर और ट्रेनों से सुरक्षित रेस्क्यू किया गया है। आरपीएफ की सतर्कता के चलते इन बच्चों को असुरक्षित परिस्थितियों में जाने से पहले ही बचा लिया गया।
आरपीएफ द्वारा रेस्क्यू किए गए बच्चों को नियमानुसार बाल कल्याण समिति (CWC), अधिकृत स्वयंसेवी संस्थाओं (NGOs) और उनके परिजनों को सुपुर्द किया गया है। अधिकारियों के अनुसार इन बच्चों में अधिकांश उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ राज्यों के रहने वाले हैं।
जानकारी के अनुसार ये बच्चे अक्सर रोजगार की तलाश में, पारिवारिक विवादों के चलते घर छोड़कर या मानव तस्करी गिरोहों के चंगुल में फंसकर ट्रेनों तक पहुंच जाते हैं। ऐसे में आरपीएफ की यह पहल उन्हें बाल श्रम, अपराध और शोषण से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
गौरतलब है कि ‘ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते’ की शुरुआत वर्ष 2018 में भारतीय रेलवे द्वारा की गई थी। इस अभियान का उद्देश्य रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में अकेले या संदिग्ध परिस्थितियों में घूम रहे बच्चों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित करना है। इसके लिए आरपीएफ के जवानों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
रेस्क्यू के बाद बच्चों की काउंसलिंग कर उनके परिवार की जानकारी जुटाई जाती है और फिर उन्हें सुरक्षित उनके परिजनों तक पहुंचाया जाता है। यह पहल न केवल बच्चों के जीवन को सुरक्षित बना रही है, बल्कि बिछड़े परिवारों को फिर से मिलाने का कार्य भी कर रही है।
आरपीएफ ने आम जनता से भी अपील की है कि यदि स्टेशन या ट्रेन में कोई बच्चा अकेला या संदिग्ध स्थिति में नजर आए, तो तुरंत रेलवे हेल्पलाइन नंबर 139 पर सूचना दें, ताकि समय रहते उसे सुरक्षित किया जा सके।