लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
जितेन्द्रसिंहशेखावत –वरिष्ठ पत्रकार .सा. रा.प
ढूढाड़ के प्रथम कछवाहा महाराजा कांकिलदेव ने खेजड़ी (शमी वृक्ष ) की हरीथूणी रोप कर आमेर को राजधानी बनाया था ।* *संस्कृत विद्वान कलानाथ शास्त्री ने लिखा है कि . नगर की स्थापना के समय खेजड़ी का पेड़ लगाकर हरी थूणी रोपने की पुरानी परम्परा रही है।* *मिर्जा राजा जयसिंह के आलेख में हरिनारायण पुरोहित ने प्रजा की समृद्धि के लिए नगर में हरी थूणी रोपने की बात लिखी है।* *बीकानेर की स्थापना के समय भी खेजड़ी का पौधा लगाकर हरी थूणी रोपी गई थी।* *आमेर के दसवें महाराजा राजदेव ने गद्दी संभालने के बाद विद्वानों से आमेर नगर की स्थापना का मुहूर्त करवाया था।* *इसके बाद उन्होंने सागर रोड पर बने महलों का जीर्णोद्धार करवाया ।* *अपनी महाराणी के नाम से राजोला तालाब बनवाया ।*
*काकिल देव ने शासन संभाला तब खंडहर में भगवान शिवजी की एक मूर्ति मिली थी ।* *यह मूर्ति अति प्राचीन अंबिकेश्वर महादेव का मंदिर था । महाराजा राजदेव ने सागर रोड पर बने पुराने महलों को नए सिरे से बनवाया ।* *आमेर का किला बनने के पूर्व आमेर का यह राजमहल नीचे था। महाराजा पृथ्वीराज की धर्म परायण पत्नी बाला बाई की साल एवं नृसिंह भगवान का मंदिर के इस महल में आमेर व जयपुर के कछवाहा राजाओं का राजतिलक होता आया है।*
*आमेर नरेश किल्हनदेव ने किल्हणगढ़ और कुंतल देव ने कुंतलगढ़ नामक किला बनवाया ।*
*मानसिंह प्रथम के पुत्र श्याम सिंह ने श्याम बाग बनवाया । परियों का बाग के नाम से मशहूर श्याम बाग में सातों बहनों का मंदिर बना हुआ है*
