*कछवाहा राजा को अपने पुत्रों के साथ आक्रान्ताओं से युद्ध करना पड़ा था*
……………………………
*जितेन्द्र सिंह शेखावत*
*वरिष्ठ पत्रकार
*हिन्दू समाज के चार धामों में से एक जगन्नाथ पुरी तीर्थ धाम को आक्रान्ताओं के कब्जे से छुड़ाने के लिए आमेर नरेश मान सिंह प्रथम को दो साल तक युद्ध करना पड़ा था।*
*सम्राट अकबर ने मानसिंह को उड़ीसा विजय करने भेजा था। मानसिंह को पता चला कि उड़ीसा के अफगान शासक मंदिरों को तोड़ हिन्दूओं के साथ अत्याचार कर रहे हैं।* *इतिहासकार राजीव नयन प्रसाद ने लिखा है कि उस समय कुतलू खान अफगानी उड़ीसा का शासक था। उसने हिन्दुओं के प्रमुख तीर्थ जगन्नाथपुरी में हिन्दुओं के प्रवेश पर रोक लगा दी थी और सैकड़ों मंदिरों को धराशाही कर चुका था। नागरिकाँ ने कुतलू खान के अत्याचार की कहानी मानसिंह को बताई । मानसिंह ने अपने पुत्र जगत सिंह की अगुवाई में कुतलू खान से लड़ने के लिए सेना भेजी लेकिन मानसिंह की सेना को हार का मुंह देखना पड़ा ।*
*सन् 1590 में कुतलू खान की बीमारी से मृत्यु के बाद अफगानी विद्रोहियों का दम टूट गया । अफगानियों के नए बादशाह नासिर ने मानसिंह को डेढ़ सौ हाथी व जवाहरात देने के साथ हिन्दुओं का पवित्र तीर्थ जगन्नाथ धाम भी सौंप दिया ।*
*कुछ समय बाद अफगानियों ने मानसिंह से हुई संधि तोड़ कर जगन्नाथ धाम पर फिर से कब्जा कर लिया।*
*तीन नवम्बर सन् 1591 को मान सिंह ने .फिर से अफगानियों पर हमला कर जलेश्वर तक कब्जा कर लिया।*
*इस युद्ध के हरावल में मान सिंह का पुत्र दुर्जन सिंह के अलावा सुजान सिंह और सबल सिंह आदि कछवाहा थे। इस युद्ध में अफगानी सेना मैदान छोड़ भाग छूटी ।* *सन् 1590 से 1592 तक मानसिंह को अफगानों से युद्ध करना पड़ा था। अफगानियों को खदेड़ने के बाद मान सिंह ने सबसे पहले जगन्नाथपुरी में भगवान के दर्शन किए।*
*जगन्नाथपुरी के अलावा तोड़े गए मन्दिरों का जीर्णोद्धार कराया।सिटी पैलेस से जुड़े रामू रामदेव के मुताबिक जगन्नाथ के पवित्र तीर्थ को बचाने के कार्य की सारे देश के हिंदुओ में मान सिंह की प्रशंसा हुई। अब हिंदू अपने तीर्थ स्थल पर फिर से आने लगे। मान सिंह ने मंदिर की व्यवस्था व पूजा का भार खुर्दा के राजा रामचंद्र को सौंप दिया । उसके वंशज आज भी मंदिर को संभाल रहे हैं।*
