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डॉ. सूरज प्रकाश की जयंती पर विचार गोष्ठी

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लोक टुडे न्यूज नेटवर्क 

संगठन में सभी के सामूहिक रूप से जुड़ने से उसकी शक्ति कई गुना बढ़ जाती है: त्रिलोक छाबड़ा

राष्ट्र सेवा में उनके योगदान को किया याद

भीलवाडा। (पंकज पोरवाल) भारत विकास परिषद के संस्थापक डॉ. सूरज प्रकाश की जयंती के उपलक्ष्य में भीलवाड़ा नगर की सभी शाखाओं ने भारत विकास भवन, शास्त्रीनगर में एक सामूहिक विचार गोष्ठी का आयोजन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ आमंत्रित अतिथियों ने भारतमाता, स्वामी विवेकानंद एवं परिषद के संस्थापक डॉ. सूरज प्रकाश के चित्र के समक्ष माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया। मातृशक्ति ने संगीत के साथ सामूहिक राष्ट्र गीत का गायन किया गया, जिसने पूरे वातावरण को देशभक्ति के रंग से सराबोर कर दिया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि त्रिलोक छाबड़ा (समाजसेवी एवं उद्योगपति) और विशिष्ट अतिथि डॉ. शंकर लाल माली (चित्तौड़ प्रांत कार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ) उपस्थित रहे। सर्वप्रथम, श्याम कुमावत ने अपने स्वागत उद्बोधन के माध्यम से सभी अतिथियों का अभिनंदन किया। मुख्य अतिथि त्रिलोक छाबड़ा ने अपने उद्बोधन में संगठन की शक्ति को अंकों के माध्यम से समझाया। उन्होंने कहा, संगठन में सभी के सामूहिक रूप से जुड़ने से उसकी शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए स्पष्ट किया कि किस प्रकार श्1श् के आगे श्1श् लिखने और उसके आगे श्1श् और इस प्रकार क्रमशः जुड़ने के क्रम से उस अंक की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है, इसी रूप से उन्होंने संगठन के भाव को समझाया।

कार्यक्रम में मुख्य उद्बोधन बलराज आचार्य एवं योगेन्द्र शर्मा का रहा। बलराज आचार्य ने अपने उद्बोधन में डॉ. सूरज प्रकाश के जीवन प्रसंगों को बताते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी डॉ. सूरज प्रकाश ने अपने लक्ष्य को नहीं डिगने दिया और भारत विकास परिषद के रूप में एक पौधे को रोपित किया जो आज वट वृक्ष के रूप में विस्तृत हो चुका है। डॉ. शंकर लाल माली ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्र रूपी मजबूत इमारत का निर्माण नींव के पत्थर के रूप में स्वयं को राष्ट्र के लिए समर्पित करने वालों के बल पर ही होता है। उन्होंने डॉ. सूरज प्रकाश की तुलना नींव के पत्थर से की, जो अदृश्य रहकर भी राष्ट्र निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। योगेन्द्र शर्मा ने डॉ. सूरज प्रकाश के जीवन दर्शन एवं परिषद के सेवा कार्यों को लेकर सुंदर काव्यपाठ किया, जिसने सभी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रांतीय अध्यक्ष राधेश्याम सोमानी ने परिषद के सेवा कार्यों की ओर इंगित करते हुए राष्ट्र सेवा में डॉ. सूरज प्रकाश के योगदान को अतुलनीय बताया।

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