लोक टुडे न्युज़ नेटवर्क
पादूकलां। कस्बे सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों में रविवार को देवउठनी एकादशी का पर्व श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस दिन को हरिप्रबोधिनी एकादशी या देवठान एकादशी भी कहा जाता है, जो लोक परंपरा में छोटी दिवाली के नाम से प्रसिद्ध है।
सुबह से ही घर-घर में तुलसी विवाह की तैयारियाँ शुरू हो गईं। महिलाओं ने तुलसी के पौधे को हल्दी, कुमकुम, अक्षत और पीले वस्त्रों से सजाया तथा गन्ने का मंडप बनाया। तत्पश्चात चारभुजा मंदिर परिसर में तुलसी माता और भगवान शालिग्रामजी का पारंपरिक रीति-रिवाजों से विवाह संपन्न कराया गया।
भजन–कीर्तन और मंगल गीतों के साथ विवाह की सभी रस्में निभाई गईं। मंडप सजाने से लेकर दान–दक्षिणा देने तक पूरे आयोजन में भक्ति और उल्लास का माहौल रहा। पूजन उपरांत महिलाओं ने आतिशबाजी कर आनंद व्यक्त किया। कई श्रद्धालुओं ने उपवास रखकर रात्रि में फलाहार ग्रहण किया।
गन्ने के दामों में 25 प्रतिशत वृद्धि
देवउठनी पर्व में विशेष महत्व रखने वाला गन्ना इस बार 80 रुपये जोड़ी तक बिका। पिछले वर्ष की तुलना में कीमतों में लगभग 25 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई। बाजारों में कोचईए, डांगकंद, शकरकंद और कांदा की भी खूब मांग रही।
साप्ताहिक बाजार में सिंघाड़ा, सेम्हर, कांदा और गन्ने की बिक्री जोरों पर रही। व्यापारियों दीपक सोनी और दिनेश कुमार ने बताया कि देवउठनी पर्व के चलते बिक्री में कई गुना बढ़ोतरी हुई।
भगवान विष्णु के जागरण और तुलसी विवाह का महत्व
पंडिताइन कौशल्या देवी बोहरा ने बताया कि देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु चार माह के शयन के बाद क्षीरसागर से जागते हैं। इसी दिन तुलसी माता और शालिग्रामजी का विवाह संपन्न होता है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु को अपनी परम भक्त वृंदा के श्राप से शालिग्राम रूप प्राप्त हुआ था, इसलिए तुलसी विवाह का विशेष धार्मिक महत्व है।
अबूझ मुहूर्तों की शुरुआत
मंदिर पुजारी कैलाश वैष्णव ने बताया कि देवउठनी एकादशी के साथ ही अबूझ मुहूर्तों की शुरुआत हो जाती है। 2 नवम्बर से विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों के शुभ अवसर लगातार रहेंगे। क्षेत्र में शादियों की तैयारियाँ जोरों पर हैं।
संध्या बेला में घर–आंगन दीपमालाओं से जगमगा उठे। महिलाओं ने घर–घर तुलसी स्थान सजाकर तुलसी माता और भगवान शालिग्रामजी का विवाह धूमधाम से संपन्न कराया।