लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
राजस्थान का 9% राष्ट्रीय शहद उत्पादन में योगदान; टोंक और भरतपुर में बन रहे उत्कृष्टता केन्द्र
जयपुर । मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सशक्तीकरण के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। इसी का परिणाम है कि प्रदेश अब भारत के कुल शहद उत्पादन में 9 प्रतिशत योगदान देते हुए उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और बिहार के साथ देश के शीर्ष पांच शहद उत्पादक राज्यों में शामिल हो गया है।
शहद उत्पादन बना किसानों की अतिरिक्त आय का बड़ा साधन
राज्य में 3,350 मधुमक्खी पालक कुल 2.76 लाख कॉलोनियों के माध्यम से लगभग 8,200 मीट्रिक टन शहद का वार्षिक उत्पादन कर रहे हैं। अलवर, भरतपुर और हनुमानगढ़ जिले शहद उत्पादन में सबसे आगे हैं।
किसान खेती के साथ मधुमक्खी पालन कर अपनी आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी कर रहे हैं।
सरकार दे रही भारी अनुदान, 50 हजार कॉलोनियां और बॉक्स वितरित
मुख्यमंत्री की प्राथमिकता किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। इसी दिशा में राज्य सरकार वर्ष 2025–26 में 50,000 मधुमक्खी कॉलोनियां और 50,000 मधुमक्खी बॉक्स वितरित कर रही है।
इस पर किसानों को 40% अनुदान के रूप में 8 करोड़ रुपये प्रदान किए जाएंगे।
इस कदम से किसानों की लागत में भारी कमी आएगी और आय में तेजी से वृद्धि होगी।
इसके साथ ही किसान शहद की ब्रांडिंग, पैकिंग और मार्केटिंग कर सफल उद्यमी के रूप में उभर रहे हैं।
वैज्ञानिक प्रशिक्षण और उपकरणों से होगा तकनीकी सशक्तीकरण
सरकार का फोकस मधुमक्खी पालन को वैज्ञानिक और आधुनिक तकनीक पर आधारित करना है।
इसके तहत:
-
1,000 मधुमक्खी पालकों को मधुमक्खी पालन किट वितरित की जाएंगी।
-
इन पालकों को कॉलोनियों के माइग्रेशन पर 9,000 रुपये प्रति व्यक्ति सहायता दी जाएगी।
टोंक और भरतपुर में बन रहे ‘मधुमक्खी पालन उत्कृष्टता केंद्र’
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के तहत टोंक और भरतपुर जिलों में 10-10 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं।
इन केंद्रों में उपलब्ध होंगी:
-
वैज्ञानिक प्रशिक्षण
-
उच्च गुणवत्ता वाली कॉलोनियां
-
प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और पैकिंग सुविधाएं
-
शहद गुणवत्ता परीक्षण लैब
-
मार्केटिंग एवं तकनीकी मार्गदर्शन
ये केंद्र मधुमक्खी पालकों के लिए ज्ञान, तकनीक और समाधान का प्रमुख स्रोत बनेंगे।
‘मीठी क्रांति’ से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई उड़ान
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की नीतियों, योजनाओं और नवाचारों ने मधुमक्खी पालकों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं।
शहद उत्पादन ने किसानों की आय बढ़ाने के साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार दिया है।
राज्य में तेजी से विकसित हो रही मीठी क्रांति (Sweet Revolution) किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है और आने वाले समय में शहद उद्योग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की क्षमता रखती है।
