लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल)।
बनेड़ा तहसील के जालिया गांव में जिंदल सॉ लिमिटेड के खिलाफ किसानों का आंदोलन गुरुवार को 160वें दिन में पहुंच गया। किसानों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए कंपनी द्वारा लापिया पॉइंट पर हो रही अवैध ब्लास्टिंग और खनन को तत्काल बंद कराने की मांग की है।
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे जयपुर विधानसभा के बाहर सामूहिक आत्मदाह करेंगे।
ब्लास्टिंग से चरागाह नष्ट, घरों में दरारें
किसानों ने आरोप लगाया कि अवैध ब्लास्टिंग से चरागाह भूमि बर्बाद, पशुपालन ठप और गांव के घरों व मंदिरों में दरारें पड़ रही हैं। किसान नेता कन्हैया लाल माली ने कहा कि यह किसानों की “जमीन और जीवन” का सवाल है और वे पीछे नहीं हटेंगे।
प्रशासन पर वादाखिलाफी का आरोप
ग्रामीणों ने याद दिलाया कि पूर्व में 205 दिन चले आंदोलन के बाद प्रशासन की मध्यस्थता में जिंदल कंपनी ने लिखित सहमति दी थी, पर एक भी शर्त लागू नहीं हुई। इसी वजह से किसान फिर से धरने पर बैठे हैं।
9 दिसंबर को किसानों ने शाहपुरा विधायक के माध्यम से मुख्यमंत्री को चेतावनी भरा ज्ञापन दिया था। किसानों के अनुसार, 10 दिसंबर को बनेड़ा एसडीएम ने उन्हें “जबरन समझौते” के लिए दबाव डाला, जिसे किसानों ने अस्वीकार कर दिया।
धमकियों का आरोप, माहौल तनावपूर्ण
किसानों का कहना है कि कंपनी और उसके ठेकेदारों की ओर से धरना स्थल पर जानलेवा धमकियां दी जा रही हैं, जबकि प्रशासन मौन है। स्थिति बिगड़ने की आशंका के चलते किसान संगठनों ने राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
किसानों की मुख्य मांगें
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जिंदल कंपनी की अवैध ब्लास्टिंग व खनन तत्काल बंद कराए जाएं
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पूर्व सहमति की सभी शर्तों का पालन सुनिश्चित किया जाए
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चरागाह भूमि का पुनर्स्थापन करवाया जाए
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कंपनी व ठेकेदारों द्वारा धमकी देने वालों पर मुकदमा दर्ज हो
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किसानों को मुआवजा व सुरक्षा दी जाए
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गांव की चरागाह भूमि को गांव में ही बहाल किया जाए
ज्ञापन पर कन्हैया लाल माली, भंवर रेबारी, हीरा लाल, धना रेबारी, बन्ना, मदन, शिवराज, रतन, राजकुमार गोयल सहित सैकड़ों किसानों के हस्ताक्षर हैं।
कलेक्टर का आश्वासन
कलेक्टर जसमीत सिद्धू ने शाम को किसान प्रतिनिधिमंडल से मिलकर सभी पक्षों को सुना और कहा कि जल्द हाई लेवल मीटिंग बुलाकर समस्या का समाधान करने की कोशिश की जाएगी।
जालिया गांव में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और किसान आंदोलन को और तेज़ करने की चेतावनी दे रहे हैं।
