लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
उनियारा (दुर्योधन मयंक)। क्षेत्र के श्री दिगम्बर जैन सुखोदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र सुथड़ा में अष्टान्हिका महापर्व का द्वितीय दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया।
प्रबंध समिति के महावीर प्रसाद पराणा और मनोज जैन ने बताया कि अष्टान्हिका महापर्व जैन धर्म का एक अत्यंत पवित्र और शाश्वत त्योहार है, जो साल में तीन बार—कार्तिक (अक्टूबर-नवंबर), फाल्गुन (फरवरी-मार्च), और आषाढ़ (जून-जुलाई) के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से पूर्णिमा तक आठ दिनों तक मनाया जाता है। इस पर्व में भगवान जिनेंद्र की आराधना की जाती है और स्वर्ग के देवता नंदीश्वर द्वीप में जाकर पूजा करते हैं।
इस अवसर पर भक्तगण अपने नजदीकी जैन मंदिरों में नंदीश्वर द्वीप की कल्पना कर पूजा करते हैं। आठ दिनों के दौरान विशेष पूजा, सिद्धचक्र विधान, मंडल विधान, अभिषेक और शांतिधारा का आयोजन किया जाता है।
इस बार फाल्गुन महीने का अष्टान्हिका पर्व 24 फरवरी से शुरू होकर 3 मार्च तक चलेगा। द्वितीय दिन के अवसर पर शास्त्री प्रिंस जैन देवांश के निर्देशन में मंगलाष्टक कर नित्य अभिषेक और शांति धारा संपन्न की गई। वार्षिक शांति धारा का आयोजन रमेशचंद, रौनक सर्राफ, पांडुशिला, नरेंद्र कुमार बनेठा सहित अन्य धार्मिक अनुयायियों ने किया।
इसके बाद देव शास्त्र पूजा, चौबीस भगवान की मुलनायक पूजा, पंचमेरु एवं नंदीश्वर द्वीप की पूजा कर सिद्धों की आराधना सम्पन्न हुई। शाम 6:30 बजे श्रेष्ठी परिवार नेमीचंद, संजय कुमार अंशुल, अंकित, आरव, अविका और आगम सिरस वाले निवाई, द्वितीय पुण्यार्जक मन्नालाल मनीष कुमार लाम्बा बावड़ी निवाई एवं भक्तामर मंडल बनेठा द्वारा दीपार्चना सानंद रूप में संपन्न हुई।
यह महापर्व तपस्या, आत्म-शुद्धि और धार्मिक भक्ति का प्रतीक है, और क्षेत्रवासियों में आध्यात्मिक जागरूकता एवं उत्साह का माहौल बनाता है।