लोक टुडे न्युज़ नेटवर्क
अहसास की आलम से …..
जयपुर नगर निगम ग्रेटर का रंगमंच…..जनता फिर ठगी सी देखती रह गई तय शुदा नाटक……
तो साहिबान, कद्रदान, मेहरबान! देखिए, आपकी चुनी हुई सरकार किस मेहनत और योजनाबद्ध ढंग से जनता के नाम पर “राजनीतिक रंगमंच” सजा रही है। शनिवार को जयपुर नगर निगम ग्रेटर में एक नया अध्याय जुड़ा — “कोरम का कुरुक्षेत्र”!
जयपुर नगर निगम ग्रेटर की मेयर साहिबा मंच पर, चेहरे पर शिकन और इंतज़ार में डूबीं। उधर डिप्टी मेयर साहब अपने 11 साथियों के साथ अपने कमरे में—शांत, संयमित, मगर दृढ़। कह रहे थे:
“जनता का पैसा और शहर के फैसले जल्दबाज़ी में नहीं लिए जा सकते। पहले नियम, फिर निर्णय!”
पर सियासत में जो नियमों की बात करे, वो “विरोधी” ठहरा दिया जाता है।
बैठक शाम 4 बजे शुरू होनी थी। 36 में से सिर्फ़ 14 अध्यक्ष पहुँचे। बाकी कहाँ थे? कुछ शादी में, कुछ “राजनीतिक ग़ैर-मौजूदगी” निभा रहे थे। डिप्टी मेयर ने कहा था —
“एजेंडा 7 दिन पहले देना चाहिए, ताकि 170 प्रस्तावों पर ठीक से अध्ययन हो सके।”
और हुआ क्या? एजेंडा आया सिर्फ़ एक दिन पहले!
अब आप ही बताइए — 170 प्रस्तावों को एक रात में पढ़ लेना क्या UPSC की तैयारी से आसान है?
यह विरोध नहीं था, यह प्रशासनिक अनुशासन की माँग थी। लेकिन सत्ता की आदत है — जो सवाल करे, उसे विरोधी कह दो।
