लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
राजेंद्र शर्मा जती
भरतपुर।ज़रा सोचिए… एक ऐसा आंगन जहाँ 3412 निराश्रित महिलाएँ रहती हैं — जिनके अपने कहीं पीछे छूट गए, जिनकी कलाईयों की चूड़ियाँ टूटीं तो सही, लेकिन उनके विश्वास की डोर आज भी उतनी ही मजबूत है। यही है अपना घर आश्रम, भरतपुर — जहाँ हर साल करवाचौथ का पर्व न सिर्फ़ उत्सव बनकर आता है, बल्कि उम्मीद और प्रेम की अमर मिसाल भी छोड़ जाता है।
आज इस आश्रम के स्प्रीचुअल पार्क में करवाचौथ का पर्व बड़ी ही श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इन महिलाओं के लिए यह कोई साधारण दिन नहीं — यह वो दिन है जब वे अपने पति की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं, भले ही वे पति अब उनके साथ न हों, या शायद कभी लौटें भी न।

आश्रम की 123 से अधिक माताएँ और बहनें आज भी उसी अटूट विश्वास के साथ व्रत रखती हैं। किसी के पति सालों से लापता हैं, किसी को घरवालों ने ठुकरा दिया, तो कोई मानसिक या शारीरिक बीमारी के चलते समाज से कट गईं — मगर प्रेम और आस्था का दीपक अब भी उनके दिलों में जलता है।