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राजस्थान को जैविक प्रदेश बनाने का प्रस्ताव, राज्यपाल से मिले डॉ. अतुल गुप्ता

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

OFPAI के प्रतिनिधिमंडल ने राजभवन में की मुलाकात, जैविक कृषि के लिए विशेष नीति बनाने और प्रधानमंत्री के समक्ष प्रस्ताव रखने का किया आग्रह

गौमाता के शुद्ध देसी घी और गोबर से बने दीपक किए भेंट

जयपुर। राजस्थान को जैविक कृषि का प्रमुख केंद्र बनाने की पहल के तहत ऑर्गेनिक फार्मर प्रोड्यूसर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (OFPAI) के चेयरमैन एवं अखिल भारतीय गौशाला सहयोग परिषद के अंतरराष्ट्रीय संयोजक डॉ. अतुल गुप्ता के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल हरिभाऊ बागडे से राजभवन में मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने राजस्थान को जैविक प्रदेश बनाने के लिए विशेष नीति तैयार करने तथा इस प्रस्ताव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष रखने का आग्रह किया।

दीपावली की शुभकामनाओं के साथ डॉ. गुप्ता ने राज्यपाल को गौमाता के शुद्ध देसी घी और गाय के गोबर से निर्मित पर्यावरण अनुकूल दीपक भेंट किए। इस अवसर पर राज्यपाल के साथ जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और किसानों की आर्थिक समृद्धि जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।

राजस्थान को जैविक कृषि का राष्ट्रीय मॉडल बनाने का सुझाव

डॉ. अतुल गुप्ता ने कहा कि राजस्थान में जैविक कृषि के विस्तार की व्यापक संभावनाएं हैं। प्रदेश की विशाल कृषि भूमि, समृद्ध पशुधन, पारंपरिक खेती की पद्धतियां और औषधीय पौधों की खेती की संभावनाएं इसे जैविक कृषि के क्षेत्र में राष्ट्रीय मॉडल बना सकती हैं।

उन्होंने राज्यपाल से आग्रह किया कि प्रदेश सरकार जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए व्यापक और दीर्घकालीन नीति तैयार करे। साथ ही इस विषय को प्रधानमंत्री के समक्ष रखा जाए, ताकि केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से राजस्थान में टिकाऊ कृषि विकास को गति मिल सके।

जलवायु परिवर्तन और खाद्य सुरक्षा पर जताई चिंता

मुलाकात के दौरान डॉ. गुप्ता ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, मिट्टी की घटती उर्वरता, जल संकट और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थों की उपलब्धता आज बड़ी चुनौतियां हैं। अनियमित वर्षा और बढ़ते तापमान का असर कृषि व्यवस्था पर भी पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए जैविक एवं प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करना जरूरी है।

गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर

डॉ. गुप्ता ने गौशालाओं को जैविक कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने का सुझाव देते हुए कहा कि गौशालाओं में जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट और अन्य कृषि उपयोगी उत्पादों का उत्पादन किया जा सकता है। इससे किसानों को स्थानीय स्तर पर कृषि संसाधन उपलब्ध होंगे और गौशालाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने कहा कि गौवंश आधारित उत्पादों के निर्माण, कृषि प्रशिक्षण, महिला स्वरोजगार और ग्रामीण उद्यमिता को प्रोत्साहित करके रोजगार के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं।

जैविक राजस्थान से स्वस्थ भारत का संकल्प

डॉ. गुप्ता ने कहा कि जैविक कृषि, गौ-संरक्षण और ग्रामीण उद्यमिता को एक साथ आगे बढ़ाकर राजस्थान टिकाऊ कृषि विकास की दिशा में उदाहरण प्रस्तुत कर सकता है। इसके लिए सरकार, किसान संगठनों, गौशालाओं और कृषि अनुसंधान संस्थानों के बीच समन्वय जरूरी है।

उन्होंने कहा कि ‘जैविक राजस्थान, स्वस्थ भारत और समृद्ध किसान’ का संकल्प पर्यावरण संरक्षण, सुरक्षित खाद्य उत्पादन और ग्रामीण आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

इस प्रतिनिधिमंडल में मधुसूदन दाधीच, आर.पी. जाट और अंकिता आचार्य भी शामिल रहे।

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