लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
(मेहतर) समाज से जुड़े व्यक्ति को राजस्थान के जोधपुर विश्वविद्यालय का कुलपति banaà
राजस्थान जैसे राज्य मैं जहां जातिगत कटुता इस स्तर पर रही है, कि गांवों में दलित समाज के किसी युवक की शादी पर युवक का घोड़ी पर बैठना भी कई तथाकथित उच्च जातियों को बर्दाश्त नहीं होने के किस्से अनेक बार चर्चा मैं आते रहे हैं ,उस राज्य के किसी सरकारी विश्वविद्यालय में कोई हरिजन (मेहतर) जाति का व्यक्ति कुलपति के पद पर आसीन हो जाए, यह किसी विचित्र स्वप्न को साकार होने से कम नहीं समझा जाना चाहिए ।
जब प्रोफेसर श्याम लाल जेदिया जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर में कुलपति नियुक्त हुए
मार्च 1996 में केवल राजस्थान ही नहीं अपितु पूरे भारतवर्ष के उच्च शिक्षा जगत, विशेष रूप से विश्वविद्यालयो और कॉलेजों मैं राजस्थान के मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत द्वारा दी गई यह सलाह विशेष चर्चा का विषय बन गई, जब मुख्यमंत्री की जिस निर्णायक समझे जाने वाली सलाह के आधार पर राजस्थान के जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर मे कुलपति के रूप में राजस्थान के जटिल जातिवादी परिवेश से जुड़े आयामों को दर किनार करते हुए, पहली बार हरिजन समाज से जुड़े प्रोफेसर श्याम लाल जेदिया की नियुक्ति के आदेश विधिवत रूप से जारी हुए
देशभर में विशेष चर्चा में रही अपनी इस कुलपति के रूप में नियुक्ति से जुड़े विभिन्न प्रसंगों की जानकारी देते हुए प्रोफेसर श्यामलाल ,जो कि इन दिनों जयपुर में मेरे निवास के नजदीक ही देवी नगर में आवास कर रहे हैं, मुझे बताने लगे कि मैंने कभी सपने में भी यह बात नहीं सोची थी कि मैं मेरे गृह जिले जोधपुर, जिसने आजादी के बाद राज्य को कांग्रेस के तीन-तीन मुख्यमंत्री दिए, एक मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तो तीन बार राजस्थान के मुख्यमंत्री भी रहे, से जुड़े जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय का मुझे कुलपति बनाए जाने की निर्णायक सलाह एक राजपूत जाति से जुड़े मुख्यमंत्री द्वारा दी जाएगी, वे मुझे बताने लगे कि कुलपति बनने की प्रक्रिया के दौरान मुझे जब मुख्यमंत्री के रूप में भैरो सिंह जी शेखावत से मिलने की सलाह दी गई, तो मैं बड़े असमंजस और मेरे दिल में चल रहे कई तरह के विपरीत विचारों से घिरा हुआ था, क्या कोई एक राजपूत,वह भी मुख्यमंत्री ,मुझ जैसे सदैव प्रताड़ित रहे हरिजन, वाल्मीकि और भंगी के रूप में अपनी अपमानजनक पहचान रखने वाले समाज से जुड़े व्यक्ति को कुलपति बनाए जाने का विचार भी अपने मन में रख सकता है, लेकिन यह मेरे सारे विचार और धारणाएं उस समय ध्वस्त हो गई जब मैं भैरो सिंह जी से व्यक्तिगत रूप से मिला। इसी दौरान उस समय मेरी आपके पिता, और भैरो सिंह जी के छोटे भाई बिशन सिंह जी शेखावत से भी पहली बार मुख्यमंत्री निवास में मुलाकात हुई, जिन्हें कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के चलते भैरो सिंह जी एक क्षण भी अपने से दूर नहीं रखना चाहते थे, और उनकी इच्छा के विपरीत उन्हें अपने साथ ही मुख्यमंत्री आवास में अपनी विशेष देखरेख में रख रहे थे, मैं भैरों सिंह जी से मिलने से पूर्व जब आपके पिताजी से मिला और उन्हें यह बताया कि मैं राजस्थान विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग में प्रोफेसर हूं, और हरिजन समाज का हूं, तो वह बड़े प्रसन्न हुए, मुझे बाद में पता चला की मेरे कुलपति के आदेश जारी होने से पहले भैरो सिंह जी ने मेरी अकादमिक पृष्ठभूमि के साथ अन्य पहलुओं की गहनता से जानकारी कर उन्हें बताने का निजी स्तर पर जिम्मा बिशन सिंह जी शेखावत को ही दिया था, वे मेरी जातीय पृष्ठभूमि और मेरे एकेडमिक कार्यों की जानकारी पाकर जितने प्रसन्न हुए उसका वर्णन मैं शब्दों में आज भी नहीं कर सकता हूं ।
सफल कुलपति होने के तीन मंत्र भी दिए
मैं जब सचिवालय स्थित मुख्यमंत्री कक्ष में मेरे कुलपति बनने के सिलसिले में जब अंतिम बार शेखावत साहब से मिला तो इस मुलाकात में उन्होंने मुझे एक विश्वविद्यालय में सफल कुलपति होने के तीन मंत्र भी इस दौरान बताएं , उन्होंने मुझे बताया की मेरा यह अनुभव है, कि एक सफल कुलपति को वित्तीय मामलों में किसी भी व्यक्तिगत लाभ की इच्छा नहीं रखनी चाहिए, शिक्षको के किसी भी गुट में अपने को शामिल नहीं करना चाहिए , आदर्श चरित्र का संदेश देते हुए किसी भी महिला कर्मी को कुलपति कार्यालय के अतिरिक्त अकेले कुलपति निवास पर मिलने से बचने की पूरी कोशिश करनी चाहिए, यदि आवश्यक हो तो ऐसी स्थिति में किसी पुरुष की उपस्थिति इस मुलाकात के दौरान जरूर रखनी चाहिए, शेखावत साहब द्वारा दिए गए इन तीनों मत्रों का मैंने जोधपुर ही नहीं आगे चलकर अन्य विश्वविद्यालयों में भी दृढ़ता के साथ पालन किया।
“अनटोल्ड स्टोरी ऑफ़ ए भंगी वाइस चांसलर”(Untold story of a bhangi Vice Chancellor)
पूरे देश में चर्चा में रही “अनटोल्ड स्टोरी ऑफ़ ए भंगी वाइस चांसलर”(Untold story of a bhangi Vice Chancellor) जैसी चर्चित पुस्तक के लेखक प्रोफेसर श्यामलाल,जिनकी दर्जनों पुस्तकें दलितों में भी निचले पायदान से जुड़े लोगों के विभिन्न आयामों पर केंद्रित है, जोधपुर के बाद राजस्थान विश्वविद्यालय,पटना विश्वविद्यालय बिहार के कुलपति भी रहे, राजस्थान के अंबेडकर पीठ की ड्राफ्टिंग कमेटी का अध्यक्ष भी उन्हें बनाया गया
प्रोफेसर श्यामलाल मुझे बताने लगे कि मेरी इस नियुक्ति के कुछ महीनों बाद ही अक्टूबर 96 में अपने भरत समान छोटे भाई बिशन सिंह शेखावत की मृत्यु से भैरो सिंह जी को मैंने अत्यधिक दुखी भाव में देखा, भैरो सिंह जी साहब की अनुमति से मैंने मेरी एक पुस्तक ” From higher Caste to lower caste :AProceessofAsprashyeekarans(अस्पृश्यकरण) and mith of Sanskritization(संस्कृताइजेशन) बिशन सिंह जी शेखावत जैसे महान पुरुष कि स्मृति में समर्पित की
*डॉ भूपेंद्र सिंह शेखावत अध्यक्ष श्री बिशन सिंह शेखावत शोध एवं शिक्षण संस्थान* 9413343291
