लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
कांग्रेस को मनरेगा में सुधार से क्या परेशानी?
जयपुर। (रूपनारायण सांवरिया) भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कांग्रेस द्वारा मनरेगा के नाम परिवर्तन और वीबी—जी राम जी योजना को लेकर किए जा रहे विरोध प्रदर्शन पर कड़ा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को मनरेगा में सुधार से आखिर आपत्ति क्यों है। मनरेगा का नाम अब “विकसित भारत गारंटी—रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)” रखा गया है, जिसका संक्षिप्त रूप वीबी—जी राम जी है। इसमें गलत क्या है? क्या कांग्रेस नेताओं को ‘राम’ नाम से आपत्ति है?
मदन राठौड़ ने कहा कि कांग्रेस का प्रदर्शन पूरी तरह मुद्दा-विहीन है और केवल जनता को भ्रमित करने का प्रयास है। कांग्रेस सिर्फ हंगामा करने के लिए ऐसे विषयों को मुद्दा बना रही है जिनका ज़मीनी सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं को आत्ममंथन और सुधार की सख्त जरूरत है।
मनरेगा में सुधार पर सवाल क्यों?
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मनरेगा को विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ने का काम किया तो इसमें क्या गलत है?
भ्रष्टाचार पर रोक लगाई तो क्या गलत किया?
रोज़गार के दिनों की संख्या बढ़ाई तो क्या गलत किया?
और मजदूरी का भुगतान 15 दिनों के भीतर सुनिश्चित किया तो इसमें आपत्ति क्यों?
उन्होंने कहा कि कांग्रेस वहां विरोध नहीं करती जहां वास्तव में करना चाहिए। पश्चिम बंगाल में कोयला घोटाले को लेकर ईडी की कार्रवाई में हस्तक्षेप किया जा रहा है, वहां कांग्रेस को राजनीतिक रूप से पनपने तक नहीं दिया जा रहा, फिर भी कांग्रेस वहां कोई ठोस विरोध दर्ज नहीं कर रही। इससे साफ है कि कांग्रेस अब हल्के स्तर की राजनीति पर उतर आई है।
भ्रष्टाचारियों का साथ, राष्ट्रहित का विरोध
मदन राठौड़ ने आरोप लगाया कि कांग्रेस एक ओर भ्रष्टाचारियों का साथ दे रही है और दूसरी ओर ‘राष्ट्र प्रथम’ और ‘विकसित भारत’ की दिशा में काम करने वालों का विरोध कर रही है। उन्होंने कांग्रेस के तथाकथित मौन अनशन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि नेता मोबाइल पर बातचीत करते और मीडिया को बयान देते दिखे, फिर यह मौन अनशन कैसा?
वीबी—जी राम जी योजना की प्रमुख विशेषताएं
राठौड़ ने बताया कि वीबी—जी राम जी योजना के तहत—
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प्रत्येक ग्रामीण परिवार को सालाना 125 दिन का रोजगार सुनिश्चित किया गया है।
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कार्य समाप्ति के 15 दिनों के भीतर मजदूरी भुगतान अनिवार्य किया गया है, देरी होने पर मुआवजे का प्रावधान है।
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योजना निर्माण और क्रियान्वयन में ग्राम पंचायतों और ग्राम सभाओं को प्रमुख भूमिका दी गई है।
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केवल शारीरिक श्रम ही नहीं, बल्कि कौशल विकास, स्वरोजगार और उद्यमिता पर भी विशेष जोर है।
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जॉब कार्ड अब पहचान आधारित होंगे, जबकि कांग्रेस शासन में फर्जी जॉब कार्ड बनाकर बड़े घोटाले किए गए।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासनकाल में मजदूरों की मजदूरी में गबन हुआ और तत्कालीन मंत्री रमेश मीणा ने सार्वजनिक रूप से मनरेगा में घोटाले स्वीकार किए थे।
पारिवारिक और सामाजिक संतुलन पर भी दिया संदेश
भाषण के अंत में मदन राठौड़ ने सामाजिक विषयों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज परिवारों में कुटुंब प्रबंधन की जरूरत है—परिवार के साथ बैठकर संवाद, भोजन, समस्याओं पर चर्चा और मोबाइल से दूरी बेहद आवश्यक है। बच्चों में बढ़ती गुस्से की प्रवृत्ति को उन्होंने घातक बताया और संयम, शांति व सोच-समझकर बोलने की सलाह दी।