लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
महिलाओं ने संतान की दीर्घायु के लिए रखा व्रत
गौ-बछड़े का विधि-विधान से पूजन कर महिलाओं ने की संतान के अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना
गंगधार, झालावाड़। (सुनील निगम, लोक टुडे)
झालावाड़ जिले के गंगधार क्षेत्र में भाद्रपद कृष्ण पक्ष की द्वादशी के अवसर पर बछ बारस (गोवत्स द्वादशी) का पर्व श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। महिलाओं ने संतान की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना को लेकर व्रत रखा और गाय-बछड़े का विधि-विधान से पूजन किया।
राजस्थान सहित कई राज्यों में बछ बारस का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व माना जाता है। इस दिन महिलाएं दिनभर व्रत रखकर बछ बारस की पौराणिक कथा का श्रवण करती हैं तथा संतान के मंगल और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करती हैं।
गाय और बछड़े का किया पूजन
बछ बारस के अवसर पर महिलाओं ने सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर दूध देने वाली गाय और उसके बछड़े की पूजा की। पूजा के दौरान गाय-बछड़े को तिलक लगाया गया, मौली बांधी गई और माला आदि पहनाकर श्रद्धापूर्वक पूजन किया गया।
इसके बाद गाय और बछड़े को भीगे हुए चने, मोठ, बाजरा और गुड़ का भोग कराया गया। महिलाओं ने पूजा-अर्चना के बाद अपनी संतान की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की।
चाकू-कैंची का प्रयोग नहीं करने की परंपरा
बछ बारस के दिन भोजन बनाने और खाद्य सामग्री तैयार करने में चाकू या कैंची का प्रयोग नहीं करने की परंपरा है। इस दिन महिलाएं पारंपरिक तरीके से भोजन तैयार करती हैं।
व्रत के दौरान गेहूं और गाय के दूध से बने पदार्थों का सेवन नहीं किया जाता। गाय के दूध, दही और घी के स्थान पर कई परिवारों में भैंस या बकरी के दूध का उपयोग करने की परंपरा है।
बाजरे की रोटी और अंकुरित अनाज का सेवन
बछ बारस पर गेहूं की रोटी के बजाय बाजरे की रोटी यानी सोगरा खाने की परंपरा है। इसके साथ अंकुरित अनाज, विशेषकर मोठ-बाजरा, का सेवन किया जाता है।
महिलाएं पूरे दिन व्रत रखकर धार्मिक कथा सुनती हैं और पूजा-अर्चना के बाद पारंपरिक आहार ग्रहण करती हैं।
संतान की मंगल कामना से जुड़ा पर्व
बछ बारस को मातृत्व और संतान की मंगल कामना से जुड़ा प्रमुख पारंपरिक पर्व माना जाता है। गंगधार क्षेत्र में भी महिलाओं ने श्रद्धा और आस्था के साथ पर्व मनाते हुए गौ-बछड़े की पूजा की तथा अपनी संतान की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की।
