लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
नागौर। ( श्याम माथुर) उपचुनाव को लेकर संगठन की 4 बैठकें हुईं, उपचुनावों में जीत और संगठन मजबूत करने को लेकर चर्चा हुई। राजस्थान में 7 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं, इनमें से नागौर की खींवसर सीट को काफी हाॅट सीट माना जा रहा है। खींवसर विधानसभा सीट पर जीत भाजपा और कांग्रेस के लिए पहेली बनी हुई है। उपचुनाव को लेकर भाजपा के प्रदेश प्रभारी राधा मोहन अग्रवाल, प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ और प्रदेश सहप्रभारी विजया राहटकर खींवसर आए और संगठन के पदाधिकारियों व कार्यकर्त्ताओं के साथ 4 बैठकें की।
3 बैठकें लालावास के संकट मोचन मंदिर और 1 बैठक खींवसर फोर्ट में हुई
संगठनात्मक बैठकें लालावास मंदिर में हुईं। बैठक में पहुंचने से पहले भाजपा नेता रेवंतराम डांगा ने प्रदेश पदाधिकारियों का स्वागत किया। बैठकें शुरु होने से पहले प्रदेशाध्यक्ष सहित अन्य पदाधिकारियों ने संकट मोचन धाम में पूजा अर्चना की। जिसके बाद प्रदेश स्तरीय पहली बैठक बंद कमरे में शुरू हुई। इस दौरान डॉ. हापूराम चौधरी व पूर्व डीआईजी सवाई सिंह चौधरी के बैठक में शामिल ना होने को लेकर कार्यकर्त्ताओं में बहस हुई। हालांकि भाजपा पदाधिकारियों ने कहा कि बैठक में किसी को शामिल करना या ना करना पार्टी का अंदरुनी निर्णय है। डॉ. हापूराम व सवाई सिंह के समर्थकों ने कहा कि दोनों ही रेवंतराम डांगा की तरह उपचुनाव की टिकट के दावेदार हैं लेकिन रेवंतराम डांगा को बैठक में शामिल कर लिया गया।
दूसरी बैठक में जिला कार्यसमिति के पदाधिकारियों के साथ चर्चा की गई। इसमें पार्टी के सदस्यता अभियान को आगे बढ़ाने को लेकर चर्चा की गई। प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड ने कहा कि आमजन भाजपा के सदस्यता अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। तीसरी बैठक में मंडल कार्यसमिति और चौथी बैठक में सभी सामूहिक रूप से शामिल हुए।
बैठक के बाद हालांकि प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने उपचुनाव की तैयारी से इंकार कर दिया। प्रदेशाध्यक्ष राठौड़ ने कहा कि राजस्थान के हर हिस्से में आमजन से मिलकर सरकार की योजनाओं का फीडबैक लिया जा रहा है। खींवसर में कोई गुटबाजी नहीं है, हम सिर्फ जीतने के लिए आगे बढ़ रहे हैं। बिखराव नहीं होने देंगे। चुनावों की घोषणा होते ही सभी उम्मीदवारों से बैठकर चर्चा होगी। तभी ये पता चल पाएगा कि कौन उम्मीदवार कितने पानी में है? मीडिया को महिला अत्याचारों की बजाय पॉजिटिव खबरों पर ध्यान देना चाहिए।
प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने नवगठित जिलों के भविष्य को लेकर कहा कि ये प्रदेश सरकार का विषय है, मैं इसमें कहीं नहीं हूं। मेरा काम सिर्फ सुझाव देने और संगठन मजबूत करने का है, मिच्छामी दुक्कड़म्। संगठन में फिलहाल कोई बदलाव नहीं होगा, कोई आवाज ऐसी आएगी तो छोटा- मोटा बदलाव जो सकता है।
