लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
निर्वाचन आयोग का पक्ष जाने बिना उसकी निष्पक्षता पर सवाल क्यों? मुख्यमंत्री ने SIR को लेकर कांग्रेस से मांगे तथ्य और दस्तावेज
लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
जयपुर। (रूपनारायण सांवरिया)
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को कमजोर करने और चुनावी हार की जिम्मेदारी से बचने के लिए तथ्यहीन आरोप लगाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस के पास निर्वाचन प्रक्रिया या विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कोई ठोस तथ्य और प्रमाण हैं तो उन्हें सार्वजनिक करना चाहिए। बिना प्रमाण के संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव में हार के बाद कांग्रेस को अपनी राजनीतिक कमियों और जनसमर्थन की समीक्षा करनी चाहिए, लेकिन इसके बजाय वह निर्वाचन आयोग और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है। उन्होंने कहा कि राजनीति आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझने और उनके साथ खड़े होने से होती है।
तीनों निर्वाचन आयुक्तों की सहमति का आयोग का दावा
भजनलाल शर्मा ने कहा कि 26 सितंबर को निर्वाचन आयोग की ओर से जारी स्पष्टीकरण में कहा गया है कि SIR से जुड़े निर्णय तीनों निर्वाचन आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि 24 जून 2025 को जारी मूल आदेश और राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के लिए निर्धारित प्रक्रिया को लेकर निर्णय पूर्ण आयोग की सहमति से लिए गए थे।
मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि जब निर्वाचन आयोग ने अपने स्तर पर स्थिति स्पष्ट कर दी है तो कांग्रेस द्वारा आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर किए जा रहे दावों का आधार क्या है। उन्होंने कहा कि किसी मीडिया रिपोर्ट के आधार पर संवैधानिक संस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठाने से पहले आयोग का पक्ष भी जाना जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी दिया हवाला
मुख्यमंत्री ने कहा कि 27 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में SIR की कानूनी वैधता को बरकरार रखा था। अदालत ने माना था कि मतदाता सूची को अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाने के उद्देश्य से की गई यह प्रक्रिया वैधानिक ढांचे के भीतर है और इसके लिए निर्वाचन आयोग के पास अधिकार है।
उन्होंने सवाल किया कि न्यायिक प्रक्रिया के बाद भी कांग्रेस SIR पर लगातार सवाल उठा रही है तो उसके पास इसके समर्थन में कौन से ठोस तथ्य और दस्तावेज हैं।
फॉर्म में बदलाव का दावा है तो दस्तावेज सामने रखें
भजनलाल शर्मा ने कहा कि निर्वाचन आयोग के अनुसार SIR से जुड़े फॉर्म और प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट की जा चुकी है। आयोग ने 26 सितंबर के अपने स्पष्टीकरण में यह भी कहा कि फॉर्म-6 में किए गए बदलावों को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखा गया था।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस से पूछा कि यदि पार्टी फॉर्म या नियमों में किसी बदलाव का दावा करती है तो उसका आधिकारिक दस्तावेज जनता के सामने क्यों नहीं रखा जाता।
उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग की ओर से पात्र मतदाताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न स्तरों पर कदम उठाए जा रहे हैं। 26 सितंबर के आयोग के निर्णय के अनुसार, जिन लोगों को SIR के दौरान नोटिस दिए गए हैं, उनके दस्तावेज जुटाने के लिए BLO उनके घर भी जा सकते हैं।
कांग्रेस से पूछे कई सवाल
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस से सवाल किया कि—
- SIR को लेकर निर्वाचन आयोग में कथित मतभेद का प्रमाण क्या है?
- कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र को SIR से जोड़ने का आधार क्या है?
- संबंधित फॉर्म में कथित बदलाव का आधिकारिक दस्तावेज कहां है?
- मीडिया रिपोर्ट को राजनीतिक आरोप का आधार बनाने से पहले उसका सत्यापन किया गया था या नहीं?
- निर्वाचन आयोग के स्पष्टीकरण के बाद क्या कांग्रेस अपने आरोपों की समीक्षा करेगी?
भजनलाल शर्मा ने कहा कि राजनीतिक असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं और न्यायालयों के संबंध में सार्वजनिक बयान देते समय तथ्यों और प्रमाणों की जिम्मेदारी भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी राजनीतिक दल के पास गंभीर आरोपों के समर्थन में दस्तावेज और प्रमाण हैं तो उन्हें जनता के सामने रखना चाहिए। केवल आरोप लगाने से लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भरोसा मजबूत नहीं होता। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस से संवैधानिक संस्थाओं को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर तथ्य सार्वजनिक करने की मांग की।