Home latest युवावस्था की दहलीज पर अच्छी संगत, संयम और चरित्र जरूरी: आईएएस डॉ....

युवावस्था की दहलीज पर अच्छी संगत, संयम और चरित्र जरूरी: आईएएस डॉ. बी.सी. बधाल

0

लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

राजकीय कॉलेज में मोटिवेशनल सेमिनार, विद्यार्थियों को लक्ष्य के प्रति समर्पण और निरंतर प्रयास का दिया संदेश

नवीन कुमावत

किशनगढ़-रेनवाल। युवावस्था जीवन का ऐसा पड़ाव है, जहां सही दिशा और संगत व्यक्ति के भविष्य को आकार देती है। इस उम्र में युवाओं को अच्छी संगत, संयम और चरित्र पर विशेष ध्यान देना चाहिए। कई बार युवा लक्ष्य से भटककर गलत निर्णय ले लेते हैं, जिसका असर उनके पूरे जीवन पर पड़ सकता है।

यह बात आईएएस डॉ. भागचंद बधाल ने शनिवार को किशनगढ़-रेनवाल के तहसील चौराहे स्थित राजकीय कॉलेज में आयोजित मोटिवेशनल सेमिनार में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कही।

लक्ष्य के लिए सुविधा नहीं, समर्पण जरूरी

डॉ. बधाल ने कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों को शिक्षा के क्षेत्र में पहले की तुलना में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन केवल सुविधाओं से प्रतिभा निखरना संभव नहीं है। सुख-सुविधाएं लक्ष्य तक पहुंचने में मदद कर सकती हैं, लेकिन सफलता का आधार लक्ष्य के प्रति इच्छा, समर्पण और निरंतर मेहनत है।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि दूसरों की कमियां तलाशने के बजाय अपनी खूबियों को विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए। लक्ष्य स्पष्ट हो और उसे हासिल करने के लिए लगातार प्रयास किया जाए तो कठिन परिस्थितियां भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनतीं।

सवाल-जवाब के जरिए विद्यार्थियों से संवाद

मोटिवेशनल संबोधन के बाद डॉ. बधाल ने विद्यार्थियों से सामान्य ज्ञान और राजस्थान से जुड़े विभिन्न विषयों पर सवाल पूछे। सही जवाब देने वाले विद्यार्थियों को उन्होंने अपनी लिखित पुस्तक ‘आरएएस कैसे बनें’ पुरस्कार के रूप में भेंट की।

इस दौरान विद्यार्थियों ने प्रतियोगी परीक्षाओं और प्रशासनिक सेवाओं से जुड़े विषयों को लेकर भी जानकारी हासिल की।

राजस्थानी परंपरा से किया अभिनंदन

कार्यक्रम के बाद क्षेत्र के प्रबुद्ध ग्रामीणों ने बनवारी लाल एचरा और भवानीशंकर चोटिया के नेतृत्व में आईएएस डॉ. बी.सी. बधाल का राजस्थानी परंपरा के अनुसार साफा पहनाकर और फूलों की माला से स्वागत किया।

कॉलेज के लालचंद यादव ने कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विद्यार्थियों को प्रशासनिक सेवाओं, प्रतियोगी परीक्षाओं और जीवन में लक्ष्य निर्धारण के लिए मार्गदर्शन एवं प्रेरणा देना इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य है।

‘शिक्षा से सपने साकार’ रही कार्यक्रम की थीम

कार्यक्रम की थीम ‘शिक्षा से सपने साकार’ रखी गई। डॉ. बधाल ने विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य पहचानने, सपनों को दिशा देने और सफलता के लिए निरंतर प्रयास करते रहने का संदेश दिया।

सेमिनार में विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ भाग लिया और वक्ता के अनुभवों एवं मार्गदर्शन से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी तथा करियर को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी हासिल की।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version