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स्वच्छ भारत मिशन के बीच गंदगी का साम्राज्य 

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

 फुलेरा की नालियां पूछ रही—कहां है सफाई व्यवस्था?

2 अक्टूबर को झाड़ू या पूरे साल सफाई? नए पालिका बोर्ड के सामने पहला बड़ा सवाल

फुलेरा। स्वच्छ भारत मिशन के तहत देशभर में स्वच्छता को लेकर लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन फुलेरा शहर में कई स्थानों पर जमीनी तस्वीर इन अभियानों से अलग नजर आ रही है। शहर के मुख्य मार्गों के किनारे उगी झाड़ियां, जंगली पेड़-पौधे और जमा गंदगी पालिका की नियमित सफाई व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।

शहर के कई प्रमुख रास्तों के किनारे बने नाले और नालियां भी गंदगी, कचरे और मिट्टी से अटी पड़ी हैं। लंबे समय से सफाई नहीं होने के कारण कई जगह नालियां जर्जर स्थिति में पहुंचती नजर आ रही हैं। इससे गंदे पानी की निकासी प्रभावित होने के साथ बारिश के दौरान जलभराव की समस्या पैदा होने की आशंका भी बनी हुई है।

सफाई दस्ता मौजूद, फिर भी हालात जस के तस

फुलेरा में सफाई व्यवस्था के लिए पालिका का सफाई दस्ता मौजूद है और सफाई कार्यों पर संसाधन भी खर्च किए जाते हैं। इसके बावजूद मुख्य मार्गों और नालियों की स्थिति सवाल खड़ा करती है कि नियमित सफाई, कचरा उठाव और झाड़ियों की कटाई-छंटाई का काम कितनी प्रभावी तरीके से हो रहा है।

शहरवासियों का कहना है कि सफाई व्यवस्था केवल विशेष अवसरों या अधिकारियों के निरीक्षण तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। नालियों की नियमित सफाई, झाड़ियों की कटाई, कचरे का समय पर उठाव और जल निकासी की व्यवस्था पालिका की नियमित जिम्मेदारी है।

2 अक्टूबर पर फिर फोटो सेशन का सवाल

हर वर्ष 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर विभिन्न स्थानों पर स्वच्छता अभियान आयोजित किए जाते हैं। जनप्रतिनिधि और अधिकारी हाथों में झाड़ू लेकर स्वच्छता का संदेश देते नजर आते हैं। ऐसे में शहरवासियों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या इस बार भी स्वच्छता अभियान केवल एक दिन की गतिविधि बनकर रह जाएगा या इसके बाद भी शहर में नियमित सफाई व्यवस्था जारी रहेगी?

नए पालिका बोर्ड के सामने बड़ी चुनौती

अब शहर की निगाहें नवनिर्वाचित पालिका अध्यक्ष राजू शर्मा और सभी वार्ड पार्षदों पर टिकी हैं। नए बोर्ड के सामने चुनौती सिर्फ स्वच्छता अभियान आयोजित करने की नहीं, बल्कि शहर की रोजमर्रा की सफाई व्यवस्था को व्यवस्थित और प्रभावी बनाने की भी है।

मुख्य मार्गों के किनारे उगी झाड़ियों और जंगली पेड़-पौधों की कटाई, नालियों की सफाई एवं आवश्यक मरम्मत, गंदे पानी की सुचारु निकासी और नियमित कचरा उठाव जैसे मुद्दों पर प्राथमिकता से काम किए जाने की जरूरत है।

नारों से नहीं, नियमित निगरानी से बदलेगी तस्वीर

शहरवासियों का कहना है कि स्वच्छ शहर का लक्ष्य केवल नारों और एक-दिवसीय अभियानों से हासिल नहीं होगा। इसके लिए नियमित सफाई, प्रभावी निगरानी और जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही जरूरी है।

अब देखना होगा कि नया पालिका बोर्ड फुलेरा की सफाई व्यवस्था को लेकर कितनी गंभीरता दिखाता है और 2 अक्टूबर के एकदिवसीय अभियान से आगे बढ़कर शहर को नियमित एवं प्रभावी सफाई व्यवस्था कब तक मिल पाती है।

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