लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
ब्रह्माकुमारी संस्थान के 90वें स्थापना दिवस पर नवदशकोत्सव एवं ग्लोबल समिट आयोजित, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने संस्कृति और प्रकृति संरक्षण पर दिया जोर
सिरोही/जयपुर। राज्यसभा सांसद नितिन नवीन ने कहा कि सेवा केवल किसी कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह हमारे स्वभाव का हिस्सा बने। समाज और राष्ट्र के हित में कार्य करते समय ‘मैं’ की बजाय ‘हम’ की भावना को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्थान की 90 वर्षों की आध्यात्मिक यात्रा सेवा, साधना, शांति और विश्व बंधुत्व का प्रेरक उदाहरण है।
नितिन नवीन आबूरोड स्थित ब्रह्माकुमारी संस्थान के 90वें स्थापना दिवस पर आयोजित नवदशकोत्सव एवं ग्लोबल समिट को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने संस्थान की थीम ‘जागृति से कर्म तक’ का उल्लेख करते हुए कहा कि जागृति तभी सार्थक है, जब विचार व्यवहार में उतरें और व्यक्ति अपने आचरण से समाज में सकारात्मक बदलाव लाए। निःस्वार्थ सेवा, समर्पण और सहयोग भारतीय संस्कृति की मूल पहचान हैं।
‘वुमन-लेड डेवलपमेंट’ से राष्ट्र निर्माण में बढ़ेगी मातृशक्ति की भूमिका
राज्यसभा सांसद ने कहा कि भारतीय परंपरा में महिलाओं का ज्ञान, दर्शन और आध्यात्मिकता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘वुमन-लेड डेवलपमेंट’ विजन महिलाओं को केवल विकास का लाभार्थी बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें विकास का नेतृत्वकर्ता बनाने पर केंद्रित है। मातृशक्ति की नेतृत्व क्षमता समाज और राष्ट्र को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
उन्होंने कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्थान ने अर्बुदांचल की पवित्र भूमि को योग, साधना और आध्यात्मिक चेतना के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया है। संस्थान की गतिविधियां समाज में सकारात्मक विचारों और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने में योगदान दे रही हैं।
नशामुक्त युवा ही सुरक्षित भविष्य की आधारशिला
नितिन नवीन ने युवाओं को नशे से दूर रखने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि नशामुक्त युवा ही देश के भविष्य को सुरक्षित और सुदृढ़ बना सकते हैं। नशामुक्ति अभियान को व्यापक जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ाना होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार और ब्रह्माकुमारी संस्थान के साझा प्रयासों से इस संदेश को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाया जा सकेगा।
विकसित भारत 2047 के लिए नागरिकों की भागीदारी जरूरी
उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य 140 करोड़ नागरिकों का साझा संकल्प बनना चाहिए। राष्ट्र निर्माण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
नितिन नवीन ने मूल्य शिक्षा को युवाओं तक पहुंचाने, सेवा भाव से समाज के बीच काम करने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि संस्थान के 90वें स्थापना वर्ष के अवसर पर 90 लाख पौधे लगाने, एक लाख से अधिक रक्तदान कराने और 90 प्रमुख शहरों में आध्यात्मिक सभाएं आयोजित करने जैसे संकल्प समाज में सहयोग, संवेदनशीलता और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करते हैं।
योग और आध्यात्मिकता से विश्व कल्याण का संदेश: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के माध्यम से भारतीय योग परंपरा को वैश्विक पहचान मिली है। ब्रह्माकुमारी संस्थान राजयोग के जरिए विश्व शांति और कल्याण के लिए कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना के साथ आगे बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री ने जी-20 शिखर सम्मेलन के माध्यम से दुनिया को दिए गए ‘एक पृथ्वी, एक परिवार और एक भविष्य’ के संदेश का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा तथा सोमनाथ, काशी और महाकाल लोक में हुए विकास कार्यों से देश की सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा मिली है।
29 करोड़ पौधे लगाने का दावा, खेजड़ी सहित 29 वृक्षों के संरक्षण के लिए विधेयक
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में आध्यात्मिक विकास और प्रकृति संरक्षण के लिए प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। देवालयों, संतों और लोक देवताओं से जुड़े तीर्थ स्थलों का विकास किया जा रहा है और पैनोरमा बनाए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत प्रदेश में 29 करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं। साथ ही, खेजड़ी सहित 29 वृक्षों के संरक्षण के लिए विधेयक लाया गया है। सरकार गोवंश और गोपालकों के कल्याण के लिए भी निरंतर प्रयास कर रही है।
नदियां, पर्वत और वृक्ष भारतीय संस्कृति में पूजनीय
भजनलाल शर्मा ने कहा कि भारतीय संस्कृति ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की भावना के साथ समस्त जीव-जगत, प्रकृति और पर्यावरण के कल्याण की कामना करती है। हमारी परंपरा प्रत्येक जीव में शिव और नर में नारायण के दर्शन करती है। गंगा-यमुना जैसी नदियों को माता, आबूराज और गिरिराज पर्वतों को देवस्वरूप तथा खेजड़ी और पीपल जैसे वृक्षों को पूजनीय माना जाता है।
उन्होंने कहा कि विश्व कल्याण के लिए प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और व्यापक मानवीय दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।
आबूराज में एयर स्ट्रिप के विकास के लिए केंद्र से समन्वय
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में आबूराज के विकास के लिए लगातार प्रयास कर रही है। क्षेत्र में एयर स्ट्रिप के विकास को लेकर केंद्र सरकार के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है। बेहतर कनेक्टिविटी से क्षेत्र में पर्यटन और अन्य आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
कार्यक्रम से पहले राज्यसभा सांसद नितिन नवीन और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ब्रह्माकुमारी संस्थान के शांतिवन में मेडिटेशन कर लोक कल्याण की कामना की।
इस अवसर पर राज्यसभा सांसद मदन राठौड़, ब्रह्माकुमारी संस्थान की मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी मोहिनी दीदी, अतिरिक्त महासचिव राजयोगी डॉ. बी.के. मृत्युंजय सहित संस्थान के पदाधिकारी और देश-विदेश से आए प्रतिनिधि उपस्थित रहे।