लोक टुडे न्युज़ नेटवर्क
भक्तों ने ठाकुर जी को चढ़ाया छप्पन भोग, महिलाओं ने सुनाए भक्ति भजन
समदड़ी।
समदड़ी कस्बे के खत्रियों का वास स्थित सदियों पुराने प्राचीन चारभुजा मंदिर में हर वर्ष की भांति इस बार भी कार्तिक शुक्ल पक्ष के पावन महीने में अन्नकूट महोत्सव का आयोजन धूमधाम और श्रद्धा के साथ किया गया।
भक्तों की लंबी कतारें, शांतिपूर्ण माहौल में हुआ आयोजन
अन्नकूट महोत्सव के अवसर पर सुबह से ही मंदिर में भक्तों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गईं। बढ़ती भीड़ को देखते हुए भक्तों के बैठने और प्रसाद वितरण की सुव्यवस्थित व्यवस्था की गई। सभी श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्वक ठाकुर जी महाराज के दर्शन कर परिवार सहित क्षेत्र में खुशहाली और समृद्धि की कामना की।
भक्ति भजनों से गूंजा मंदिर परिसर
अन्नकूट महोत्सव से पूर्व महिलाओं द्वारा ठाकुर जी के भक्ति भजनों की एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दी गईं, जिससे पूरा मंदिर परिसर भक्ति रस में डूब गया। इसके पश्चात विधि-विधान से महा आरती की गई और छप्पन भोग का प्रसाद ठाकुर जी को अर्पित कर भक्तों में वितरित किया गया।
भगवान का विशेष श्रृंगार और छप्पन भोग का आयोजन
मंदिर पुजारी रामस्वरूप वैष्णव ने बताया कि कार्तिक शुक्ल पक्ष में हर वर्ष अन्नकूट महोत्सव का आयोजन किया जाता है। इस दिन भगवान की प्रतिमा का विशेष श्रृंगार किया जाता है, जिसके बाद मंगला आरती और फिर छप्पन भोग का प्रसाद अर्पण किया जाता है।
उन्होंने बताया कि भगवान को तेरस या पूर्णिमा के दिन छप्पन भोग चढ़ाने की परंपरा है। इस आयोजन में सर्व समाज के लोग भाग लेते हैं और अपने-अपने घरों से विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाकर भगवान को अर्पित करते हैं। सभी प्रसाद मिलकर भगवान के लिए छप्पन भोग का स्वरूप धारण करते हैं।
भक्ति और समर्पण का प्रतीक
भक्तों ने बड़े ही प्रेम और भक्ति भाव से ठाकुर जी को छप्पन भोग अर्पित किया। यह आयोजन इस भाव का प्रतीक है कि भक्त अपने जीवन के हर पहलू को भगवान के चरणों में समर्पित करता है।
माना जाता है कि इस भोग के अर्पण से भगवान श्रीकृष्ण प्रसन्न होकर अपने भक्तों को सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद देते हैं।
यह परंपरा भारतीय संस्कृति, पाक कला और सामूहिक श्रद्धा की झलक प्रस्तुत करती है, जो समाज में सकारात्मक ऊर्जा, सौभाग्य और शांति का संचार करती है।
सर्व समाज की रही सहभागिता
गांव के 36 समुदायों के लोगों ने इस आयोजन में भाग लेकर भगवान को प्रसाद अर्पित किया और छप्पन भोग आयोजन के सार्थी बने। पूरे क्षेत्र में अन्नकूट महोत्सव को लेकर भक्ति, आनंद और सौहार्द का वातावरण रहा।