Home latest माहेश्वरी समाज का सामाजिक सरोकारों को समर्पित ‘मंथन’ का प्रथम सोपान सम्पन्न

माहेश्वरी समाज का सामाजिक सरोकारों को समर्पित ‘मंथन’ का प्रथम सोपान सम्पन्न

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लोक टुडे न्यूज नेटवर्क

हमें बेटियों को भावनात्मक रूप से सशक्त बनाना होगा, उन्हें धर्म और संस्कृति के प्रति करना होगा सजग: सुभाष बाहेती

उदयपुर नगर माहेश्वरी युवा संगठन एवं माहेश्वरी फ्रेंड्स समिति, उदयपुर के संयुक्त तत्वावधान में मंथन समस्या से समाधान तक विचारगोष्ठी आयोजित

भीलवाडा। (पंकज पोरवाल) माता-पिता के पास बच्चों के लिए समय न होने से भावनात्मक रिक्तता पनप रही है, जिससे किशोरवय बेटियां प्रेम की आड़ में छल का शिकार हो रही हैं। “हमें बेटियों को भावनात्मक रूप से सशक्त बनाना होगा, उन्हें धर्म और संस्कृति के प्रति सजग करना होगा। यह बात उदयपुर नगर माहेश्वरी युवा संगठन एवं माहेश्वरी फ्रेंड्स समिति, उदयपुर के संयुक्त तत्वावधान में देवाली फतेहपुरा स्थित विद्या भवन ऑडिटोरियम में आयोजित ‘मंथन समस्या से समाधान तक विचारगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए समाजसेवी सुभाष बाहेती ने बतौर मुख्य वक्ता के रूप कही। बाहेती ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज माहेश्वरी समाज की जनसंख्या लगभग 15-20 लाख से घटकर 9 लाख तक सीमित हो गई है।

उन्होंने चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि हमारे समाज में विवाह में विलम्ब, संतानोत्पत्ति में देर, दिखावटी जीवनशैली, पारिवारिक संवाद की कमी और आधुनिकता की अंधी दौड़ ने सामाजिक सरोकारों को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने विवाह को समय पर करने, दिखावटीपन से दूर रहने, दो से अधिक संतान जन्म देने में हिचक नहीं रखने, छुआछूत मिटाने और सामाजिक एकजुटता बढ़ाने जैसे सुझाव रखे। उन्होंने कहा कि “हम सभी के पालनहार भगवान महेश हैं, पर समाज का दायित्व हमें खुद निभाना होगा।

इससे पुर्व समाज की बदलती संरचना और सामाजिक चुनौतियों के परिप्रेक्ष्य में माहेश्वरी समाज ने एक सशक्त पहल करते हुए सामाजिक चेतना को जागृत करने की दिशा में शृंखला का आरम्भ किया। संगठन अध्यक्ष मयंक मूंदड़ा ने बताया कि यह शृंखला समाज में व्याप्त ज्वलंत समस्याओं पर खुली चर्चा कर समाधान की दिशा में सामूहिक चिंतन का आरंभ है। कोषाध्यक्ष सुदर्शन लढा ने बताया कि संवाद सत्र में सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव, संबंधों में गिरती संवेदनशीलता, युवाओं की मनःस्थिति, धर्मांतरण जैसे गूढ़ व जटिल विषयों पर विशेषज्ञ वक्ताओं द्वारा तथ्यपरक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया।

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