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जिला परिषद का नवाचार

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

जिला परिषद का नवाचार: कार्मिकों ने स्वयं खरीदे पौधे, मोही में तैयार कर रहे ‘उप वन’, कलक्टर ने किया शुभारंभ

मोही में कार्मिकों ने रोपे भविष्य के साए: ‘उप वन’ निर्माण की हुई शुरुआत, जिला परिषद की अनुकरणीय पहल

70 कार्मिकों ने क्रय कर रोप दिए 531 बड़े पौधे, पंचायत ने कराई फेंसिंग, ड्रिप इरिगेशन से मिलेगा सतत पानी

हर विभाग करे जिला परिषद के नवाचार का अनुसरण, ‘उप वन’ देगा पर्यावरण संरक्षण की प्रेरणा :कलक्टर हसीजा

उद्देश्य केवल पौधारोपण नहीं, बल्कि एक स्थायी हरित विरासत तैयार करना :सीईओ बैरवा

गौतम शर्मा
राजसमंद, । जिला परिषद राजसमंद की ओर से पर्यावरण संरक्षण को समर्पित एक अभिनव पहल की गई है। जिला परिषद के 70 कार्मिकों ने व्यक्तिगत रूप से 531 बड़े पौधे क्रय कर मोही ग्राम पंचायत स्थित चारागाह भूमि पर पौधारोपण किया। आने वाले समय में ये पौधे पेड का रूप लेंगे और ‘वृक्ष कुंज’ विकसित होगा, जो न केवल हरियाली बढ़ाने का कार्य करेगा, बल्कि आने वाले समय में पर्यावरण संरक्षण का स्थायी प्रतीक भी बनेगा।

शनिवार प्रातः जिला कलक्टर अरुण कुमार हसीजा एवं जिला परिषद सीईओ बृजमोहन बैरवा मोही पहुंचे और इस नवाचार की शुरुआत की। इस अवसर पर एससी-एसटी कोर्ट जज अभिलाषा शर्मा ने भी पहुँचकर पौधारोपण किया। उनके साथ एसीईओ  सुमन अजमेरा, विकास अधिकारी महेश गर्ग, वाटरशेड एसई अनिल सनाढ्य, जनप्रतिनिधि रतन लाल भील, दिग्विजय सिंह भाटी सहित बड़ी संख्या में जिला परिषद एवं पंचायत समिति के कर्मचारी, मोही के स्थानीय जनप्रतिनिधि और प्रबुद्धजन भी उपस्थित रहे।

जिला कलक्टर अरुण कुमार हसीजा ने इस अभिनव प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल केवल एक कार्यक्रम भर नहीं है, बल्कि एक सोच है- ‘हर व्यक्ति, हर विभाग, हर संस्था को अपने स्तर पर प्रकृति के प्रति अपना कर्तव्य निभाना चाहिए।’ उन्होंने जिले के सभी विभागों, कार्यालयों, पंचायतों एवं सामाजिक संगठनों से अपील की कि वे भी इस प्रकार की नवाचारी पहल करें और अपने कार्यस्थल, विद्यालयों, गांवों, और सार्वजनिक स्थलों पर वृक्षारोपण कर अभियान से जुड़ें।

पहल के सूत्रधार जिला परिषद सीईओ बृजमोहन बैरवा ने बताया कि जिला परिषद के सभी कार्मिकों ने यह संकल्प लिया है कि हम प्रकृति से केवल लेते नहीं हैं, बल्कि उसे कुछ लौटाएंगे भी। इस अभियान में सभी कार्मिक अपने-अपने परिवारों के साथ शामिल हुए। प्रत्येक कार्मिक अपने खर्चे से पौधा खरीदकर लाया और स्वयं अपने हाथों से पौधारोपण किया।

बैरवा ने बताया कि आने वाले समय में मोही ग्राम पंचायत का यह चारागाह ‘वृक्ष कुंज’ के रूप में विकसित होगा, जो एक उप वन का स्वरूप लेगा। यहां नीम, शीशम, कदम, आम, गुलमोहर एवं दो कल्पवृक्ष सहित विविध प्रजातियों के पौधे रोपे गए हैं। यह पहल न केवल हरियाली बढ़ाएगी, बल्कि अन्य विभागों एवं संस्थाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

उन्होंने कहा कि जैसे हम अपने बच्चों को प्यार, परिश्रम और देखभाल से बड़ा करते हैं, वैसे ही इन पौधों की भी हम सभी कार्मिक मिलकर पालन-पोषण करेंगे। पौधों की सुरक्षा के लिए फेंसिंग की गई है तथा समुचित सिंचाई के लिए ड्रिप इरिगेशन सिस्टम भी कार्मिक मिलकर स्थापित करेंगे। साथ ही, पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता दिखाते हुए अभियान के दौरान क्षेत्र में बिखरी पॉलीथिन भी एकत्रित कर स्वच्छता का संदेश दिया गया।

बैरवा ने कहा कि इस नवाचार का उद्देश्य केवल पौधारोपण करना नहीं, बल्कि एक स्थायी हरित विरासत तैयार करना है, जिसकी देखरेख की जिम्मेदारी हम सभी मिलकर निभाएंगे।

पर्यावरण के लिए होंगे बहुआयामी लाभ

‘वृक्ष कुंज’ बनने से इस क्षेत्र का पारिस्थितिकी संतुलन सुदृढ़ होगा। चारागाह भूमि में हरियाली बढ़ने से वर्षा जल का बेहतर अवशोषण होगा, भूमि क्षरण रुकेगा, और स्थानीय मवेशियों को प्राकृतिक चारा उपलब्ध हो सकेगा। इसके साथ ही यह स्थल ग्रामीणों एवं बच्चों के लिए पर्यावरणीय शिक्षा का एक जीवंत उदाहरण बनेगा। इस प्रकार यह प्रयास स्थानीय स्तर पर जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में भी सहायक सिद्ध होगा।

अनुकरणीय मॉडल में बदलेगी पहल:

जिला परिषद द्वारा व्यक्तिगत योगदान से पौधे खरीदकर पौधारोपण करना न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह दर्शाता है कि पर्यावरण की रक्षा सिर्फ शासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। यह नवाचार आने वाले समय में अन्य जिलों एवं प्रदेश भर मेंएक अनुकरणीय मॉडल के रूप में प्रस्तुत हो सकता है। पर्यावरण संरक्षण की यह मुहिम तभी सफल होगी, जब प्रत्येक नागरिक, प्रत्येक परिवार और प्रत्येक संस्था इसे अपनी जिम्मेदारी समझे।

मोही में जो पौधारोपण किया जा रहा है, वह भविष्य में एक ऐसा हरित क्षेत्र बनेगा जिसमें पर्याप्त पेड़ होंगे, जो पर्यावरणीय दृष्टि से एक छोटे वन का स्वरूप देंगे। इसे ‘उप वन’ इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि यह एक सीमित क्षेत्र में, संरक्षित रूप में विकसित होगा और धीरे-धीरे एक स्थायी हरा-भरा परिसर बन जाएगा।

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