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हनुमान बेनीवाल ने बागवानी और नकदी फसलों पर इनपुट सहायता बढ़ाने की मांग की

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

नागौर/नई दिल्ली (प्रदीप कुमार डागा) – मंगलवार को लोकसभा में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सुप्रीमो और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने किसानों से जुड़े मुद्दों पर प्रश्न उठाते हुए संतरा, किन्नू जैसी बागवानी फसलें और जीरा, इसबगोल जैसी नकदी फसलों के लिए मिलने वाली कृषि इनपुट सहायता बढ़ाने की मांग की।

सांसद ने उठाए मुख्य बिंदु

  • इन फसलों की खेती में पौध सामग्री, उर्वरक, सिंचाई और अन्य संसाधनों पर अधिक खर्च आता है।

  • प्राकृतिक आपदा के समय मिलने वाली इनपुट सहायता किसानों की वास्तविक लागत के मुकाबले काफी कम है।

  • उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या एसडीआरएफ नियमों में संशोधन कर इन फसलों पर सहायता राशि 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर कम से कम 50,000 रुपये प्रति हेक्टेयर करने पर विचार किया जाएगा।

केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया

  • कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री ने लिखित जवाब में कहा कि एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) के दिशा-निर्देशों में वर्ष 2025 में संशोधन किया गया है, जिसमें संतरा-किन्नू, जीरा और इसबगोल जैसी फसलों के लिए लागत मानदंड और सहायता बढ़ाई गई है।

  • प्राकृतिक आपदा की स्थिति में राहत देने की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होती है, और एसडीआरएफ/एनडीआरएफ के तहत यह सहायता राहत के रूप में दी जाती है, मुआवजे के रूप में नहीं।

सांसद का बयान

हनुमान बेनीवाल ने कहा कि राजस्थान के कई जिलों में किसान जीरा और नकदी फसलों की खेती बड़े पैमाने पर करते हैं। इसलिए केंद्र सरकार को इनपुट सहायता की सीमा बढ़ाने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने आश्वासन दिया कि किसानों के हितों से जुड़े इस मुद्दे को वे संसद और सरकार के सामने मजबूती से उठाते रहेंगे।

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