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गंगनहर में पानी को लेकर चला आंदोलन 14वें दिन थमा

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लोक टुडे न्यूज नेटवर्क

मनजीत सिंह ब्यूरो चीफ श्रीगंगानगर

खबर श्रीगंगानगर से है यहां महाराजा गंगासिंह चौक पर गंगनहर में सिंचाई के लिए स्थायी पानी, नहर से पानी चोरी रोकने और फिरोजपुर फीडर निर्माण जैसी मांगों को लेकर चल रहा किसान आंदोलन आज 14वें दिन स्थगित कर दिया गया। प्रशासन और किसान प्रतिनिधियों के बीच निर्णायक वार्ता हुई। इसमें पांच सूत्रीय मांगों पर लिखित सहमति बनी। इसके बाद किसानों ने आंदोलन को एक बार के लिए रोकने का फैसला लिया।
कलेक्टर डॉ. मंजू की अध्यक्षता में जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और किसान प्रतिनिधियों के बीच कई घंटे बैठक चली। इसमें पांच बिंदुओं पर सहमति बनी। इन्हें लिखित रूप में दस्तावेज में शामिल किया गया। जिसमें बीकानेर कैनाल की आरडी 45 पर 2200 क्यूसेक पानी चल रहा है। विभाग ने इसे 2100 से 2200 क्यूसेक के बीच स्थायी रूप से बनाए रखने का भरोसा दिया। साथ ही 2500 क्यूसेक तक बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे। राजस्थान और पंजाब क्षेत्रों में पानी चोरी रोकने के लिए चार-चार टीमें बनाई गईं। पेट्रोलिंग शुरू हो गई है। टीमें अपनी-अपनी रीच में कार्रवाई करती रहेंगी। फिरोजपुर फीडर निर्माण के लिए पंजाब सरकार से समन्वय किया जाएगा। मुख्य अभियंता जयपुर ने दूरभाष पर बताया कि निविदा की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। चोरी की घटनाओं पर कार्रवाई के लिए पंजाब से संवाद बना रहेगा। बीकानेर कैनाल में ज्यादा पानी लाने के लिए नहर की सफाई की जाएगी। यह काम आरडी 45 के अपस्ट्रीम में होगा। इससे फिरोजपुर फीडर की टेल से अधिक पानी मिल सकेगा। गंगकैनाल में पानी की कमी के दौरान लिंक चैनल को वैकल्पिक स्रोत के रूप में उपयोग में लेने की तैयारी। इसके लिए आरडी 491 पर गेट और गंगकैनाल की आरडी 31 पर स्ट्रक्चर की मरम्मत का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा जाएगा।
वार्ता में किसानों की ओर से विधायक रूपिंद्र सिंह रूबी कुन्नर, पूर्व विधायक सोना देवी, किसान नेता कालू थोरी, रामस्वरूप बिश्नोई, नहर अध्यक्ष हनुमान पुनिया, विकास गोड, मनिंदर मान, रविंद्र तरखान, जगतार सिंह समरा समेत कई प्रतिनिधि शामिल हुए। प्रशासन की ओर से कलेक्टर डॉ. मंजू, एडीएम प्रशासन सुभाष चौधरी, जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता प्रदीप रुस्तगी, एसई धीरज चावला और आरपीएस रामेश्वर लाल मौजूद रहे।
किसान नेताओं ने प्रशासन के आश्वासन पर संतोष जताया। कहा कि आंदोलन स्थगन केवल वादों पर आधारित है। तय समय में काम नहीं हुआ तो आंदोलन फिर से शुरू किया जाएगा।

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