लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
पादूकला। मानसून की पहली बारिश के बाद खेतों और गांवों में सफेद रंग की छतरी जैसी मरु खुंभी दिखने लगी है। इसे लोग जंगलों, खेतों और बाग-बगीचों में खोजते हैं। मारवाड़ी में इसे ”सांप की छतरिया” कहा जाता है। यह सिर्फ बारिश के मौसम में ही उगती है। पेड़-पौधों के नीचे मिट्टी को चीरकर निकलती है।मरु खुंभी को सबसे महंगी सब्जी माना जाता है। ग्रामीण लोग इसे बड़ी सावधानी से इकट्ठा करते हैं। कई लोग इसे सुखाकर भी रखते हैं। इसका स्वाद अलग होता है। इसे सब्जी की तरह पकाया जाता है।
कस्बे और आसपास के इलाकों में अच्छी बारिश के बाद खेतों में यह खुंभी दिख रही है। बाजार में इसे मशरूम कहा जाता है। वैज्ञानिक भाषा में इसका नाम फ्लोरियन है। थार क्षेत्र में इसे मरु खुंभी कहा जाता है। जहां अच्छी बारिश हुई है, वहां हर खेत और धोरे में यह उग आई है।
मरु खुंभी में कई जरूरी पोषक तत्व होते हैं। यह फाइबर का अच्छा स्रोत है। इसमें कैलोरी कम होती है। इसमें विटामिन बी और डी, पोटेशियम, कॉपर, आयरन और सेलेनियम भरपूर मात्रा में होते हैं। इसमें चोलाइन नाम का पोषक तत्व भी होता है, जो मांसपेशियों की क्रिया को बनाए रखता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, थार की मरु खुंभी में कोलेस्ट्रॉल और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम होती है। इसलिए यह सेहत के लिए फायदेमंद है। कई बीमारियों में इसका इस्तेमाल दवा के रूप में भी किया जाता है।
हालांकि, मानसून में उगने वाले सभी मशरूम खाने लायक नहीं होते। कुछ मशरूम जहरीले भी हो सकते हैं। ये शरीर में फूड प्वाइजनिंग कर सकते हैं। इसलिए इन्हें पहचानकर ही खाना चाहिए।