लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली/काबुल: बदलते क्षेत्रीय समीकरणों के बीच भारत और अफगानिस्तान के संबंधों में नई सक्रियता देखी जा रही है। भारत ने अफगानिस्तान की संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता के समर्थन को दोहराते हुए मानवीय सहायता और विकास सहयोग को जारी रखा है। वहीं, पाकिस्तान ने इन बढ़ते संपर्कों पर आपत्ति जताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
कूटनीतिक और मानवीय जुड़ाव में तेजी
सूत्रों के अनुसार भारत ने काबुल में अपनी तकनीकी टीम की गतिविधियों को सक्रिय रखा है और स्वास्थ्य, खाद्य सहायता, शिक्षा व बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में सहयोग जारी है। आधिकारिक मान्यता दिए बिना भी नई दिल्ली “व्यावहारिक कूटनीति” के तहत अफगानिस्तान के साथ संपर्क बनाए हुए है, ताकि क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा हितों को संतुलित रखा जा सके।
विश्लेषकों का मानना है कि भारत की रणनीति का उद्देश्य अफगानिस्तान में मानवीय संकट को कम करने के साथ-साथ अपने दीर्घकालिक रणनीतिक हितों की रक्षा करना है। भारत लगातार यह भी दोहराता रहा है कि अफगान भूमि का उपयोग किसी भी देश के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों के लिए नहीं होना चाहिए।
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया
दूसरी ओर, पाकिस्तान ने भारत-अफगानिस्तान बढ़ते संपर्कों पर तीखी टिप्पणी की है। पाकिस्तानी नेतृत्व का कहना है कि अफगानिस्तान में भारत की सक्रियता क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित कर सकती है। पाकिस्तान का आरोप है कि उसकी सुरक्षा चिंताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।
हालांकि भारत ने इन आरोपों पर सीधी प्रतिक्रिया देने से परहेज करते हुए स्पष्ट किया है कि उसकी नीति क्षेत्रीय शांति, विकास और स्थिरता पर केंद्रित है, न कि किसी तीसरे देश के खिलाफ।
क्षेत्रीय समीकरणों पर नजर
विशेषज्ञों के अनुसार दक्षिण एशिया में बदलते भू-राजनीतिक हालात के बीच भारत का अफगानिस्तान के साथ जुड़ाव रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि यह कूटनीतिक संतुलन क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा पर क्या प्रभाव डालता है।
(मामले पर दोनों देशों की आधिकारिक प्रतिक्रियाओं और आगामी कूटनीतिक गतिविधियों पर नजर बनी हुई है।)