लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
जयपुर। ग्रामीण राजस्थान की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए राजीविका की ओर से संचालित योजनाओं को अब नवाचार, तकनीक और डिजिटल मार्केटिंग से नई गति देने की तैयारी है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को वित्तीय सहायता, कौशल विकास और बाजार उपलब्ध कराने के साथ उनके उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।
उद्योग भवन स्थित राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) में गुरुवार को मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक हुई। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रदेश के सभी 41 जिलों के जिला परियोजना प्रबंधक और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी करीब 2 हजार लखपति दीदियां बैठक में शामिल हुईं।
महिला शक्ति को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के ‘विकसित राजस्थान-2047’ के विजन को साकार करने में महिला शक्ति की अहम भूमिका है। स्वयं सहायता समूहों के जरिए महिलाएं आर्थिक गतिविधियों से जुड़कर अपनी आय बढ़ा रही हैं और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
उन्होंने राजीविका के माध्यम से महिलाओं के उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने, नए उद्यमों को प्रोत्साहित करने और आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर विशेष जोर दिया।
इसके लिए मोटिवेशनल हब, मार्केटिंग हब और इनोवेशन हब जैसी पहल विकसित की जा रही हैं। प्रत्येक जिले में यंग प्रोफेशनल्स के माध्यम से नए कारोबारी अवसर और नवाचार को बढ़ावा देने की योजना पर भी काम किया जा रहा है।
सोशल मीडिया बनेगा बाजार का नया माध्यम
मुख्य सचिव ने कहा कि डिजिटल दौर में सोशल मीडिया ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। राजीविका की ओर से फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर महिलाओं के उत्पादों और उनकी सफलता की कहानियों को प्रचारित किया जा रहा है।
उन्होंने अधिकारियों को इस दिशा में तकनीक का अधिकतम उपयोग करने और सफल महिला उद्यमियों की कहानियों को व्यापक स्तर पर सामने लाने के निर्देश दिए।
लखपति और मिलियनेयर दीदियों ने साझा किए अनुभव
बैठक में विभिन्न जिलों की लखपति और मिलियनेयर दीदियों ने अपने अनुभव साझा किए। भीलवाड़ा की सुमन व्यास, श्रीगंगानगर की सिमरन और गगनदीप कौर, झालावाड़ की सोनी मीना तथा चूरू की सुमन देवी ने बताया कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने के बाद उनके स्वरोजगार और आय में किस तरह वृद्धि हुई।
वी. श्रीनिवास ने कहा कि इन महिलाओं की उपलब्धियां व्यक्तिगत सफलता से आगे बढ़कर ग्रामीण राजस्थान में बदलती आर्थिक तस्वीर और महिला नेतृत्व की मिसाल हैं। उन्होंने ऐसी कहानियों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के निर्देश दिए, ताकि दूसरी महिलाएं भी स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने के लिए प्रेरित हों।
महिलाओं की जरूरत के हिसाब से सरल हों सेवाएं
मुख्य सचिव ने राजीविका के कार्यों में सिटिजन-सेंट्रिक अप्रोच अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि योजनाओं को महिलाओं की वास्तविक जरूरतों, अनुभवों और जमीनी समस्याओं के आधार पर अधिक सरल और प्रभावी बनाया जाना चाहिए।
बैठक में राजस्थान महिला निधि से जुड़ी बैंकिंग प्रक्रियाओं, ऋण अवधि और पुनर्भुगतान व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। महिलाओं को ऋण उपलब्ध कराने में अनावश्यक देरी नहीं हो और बैंकिंग सेवाएं समयबद्ध तरीके से मिलें, इसके लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए।
बैठक में ग्रामीण विकास विभाग के शासन सचिव कृष्ण कुणाल, राजीविका की राज्य मिशन निदेशक प्रियंका गोस्वामी, परियोजना निदेशक (प्रशासन) प्रीति सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। भारतीय स्टेट बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एसएलबीसी और RSETI के प्रतिनिधियों ने भी बैठक में भाग लिया।
राजीविका का फोकस अब सिर्फ महिलाओं को समूहों से जोड़ने तक सीमित नहीं, बल्कि उनके उत्पादों को बाजार, तकनीक और नए कारोबारी अवसरों से जोड़कर ग्रामीण महिला उद्यमिता को मजबूत करने पर है।