लोक टुडे न्युज़ नेटवर्क
सिरोही। पिण्डवाड़ा क्षेत्र में प्रस्तावित खनन परियोजना के विरोध में ग्रामीणों का आंदोलन रविवार को एक महीने का पड़ाव पार कर गया। बावजूद इसके अब तक राज्य सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है। क्षेत्र की चार ग्राम पंचायतें — भारजा, वाटेरा, भीमाना और रोहिड़ा — लगातार अपनी आवाज़ सरकार तक पहुंचाने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन नतीजा अब तक केवल आश्वासनों तक ही सीमित है।
भारजा में ‘सद्बुद्धि हवन’, सरकार के प्रति आक्रोश
सरकार की निष्क्रियता से नाराज़ भारजा ग्रामवासियों ने रविवार को गांव के हनुमान जी मंदिर परिसर में “सद्बुद्धि हवन” का आयोजन किया। ग्रामीणों ने भगवान हनुमान से प्रार्थना की कि राज्य सरकार को सद्बुद्धि मिले ताकि क्षेत्र को पर्यावरणीय नुकसान पहुंचाने वाली प्रस्तावित खनन परियोजना को रद्द किया जा सके। हवन में बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
ग्रामीणों का कहना है, “यह आंदोलन सिर्फ खनन के खिलाफ नहीं, बल्कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा का संघर्ष है। हम अपने भविष्य के लिए यह लड़ाई लड़ रहे हैं।”
वाटेरा में रणनीतिक बैठक, नेताओं के खिलाफ नारेबाजी
वहीं वाटेरा गांव में भी ग्रामीणों की एक अहम बैठक आयोजित की गई। इसमें आगामी रणनीति पर मंथन हुआ। वक्ताओं ने कहा कि आंदोलन को एक महीना हो गया है लेकिन सरकारी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी और अविश्वास है। इस दौरान ग्रामीणों ने सत्तारूढ़ दल के नेताओं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी — “अगर जल्द परियोजना निरस्त नहीं हुई, तो आंदोलन और तेज़ होगा।”
“हम अपनी जमीन बचाएंगे” — ग्रामीणों का संकल्प
गांवों में अब हर वर्ग के लोग एकजुट होकर परियोजना का विरोध कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि “हम अपनी जमीन, पानी और पर्यावरण को किसी भी कीमत पर बर्बाद नहीं होने देंगे। चाहे इसके लिए हमें कितनी भी लंबी लड़ाई क्यों न लड़नी पड़े।”
पर्यावरणीय खतरे को लेकर चिंता बरकरार
पिण्डवाड़ा क्षेत्र में प्रस्तावित यह खनन परियोजना बड़े पैमाने पर पर्यावरण को प्रभावित कर सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना से नदियां, पेयजल स्रोत और कृषि भूमि नष्ट हो जाएगी। बीते एक महीने से लगातार धरने, रैलियां, जनसभा और हवन यज्ञ के माध्यम से विरोध जताया जा रहा है, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई निर्णायक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
