लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
उनियारा (दुर्योधन मयंक)। श्री दिगम्बर जैन सुखोदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र सुथड़ा में जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) का जन्म कल्याणक महोत्सव श्रद्धा और धूमधाम के साथ मनाया गया।
प्रबंध कमेटी अध्यक्ष महावीर प्रसाद पराणा एवं गजानंद बड़जात्या ने बताया कि भगवान आदिनाथ जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर और आदिपुरुष माने जाते हैं, जिन्होंने मानव समाज को कृषि, लेखन, कला, वाणिज्य और शिल्प जैसी जीवन व्यवस्थाओं की शिक्षा दी। उनका जन्म अयोध्या में राजा नाभिराय और रानी मरुदेवी के यहां हुआ था। वैराग्य धारण कर उन्होंने तपस्या की और अंततः कैलास पर्वत से मोक्ष प्राप्त किया। उनका प्रतीक चिन्ह बैल (वृषभ) है।
कार्यक्रम के दौरान शास्त्री प्रिंस जैन देवांश के निर्देशन में सर्वप्रथम मंगलाष्टक के साथ नित्य अभिषेक और शांतिधारा का आयोजन किया गया। वार्षिक शांतिधारा के पुण्यार्जक रमेशचंद, रौनक सर्राफ (निवाई वाले जयपुर) तथा पाण्डुकशिला शांतिधारा नवीन कुमार (गाजियाबाद, इंदौर) द्वारा की गई।
इसके बाद देव-शास्त्र पूजा, चौबीस भगवान की मूलनायक पूजा और आदिनाथ भगवान की विशेष पूजा-अर्चना के साथ जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया गया।
भक्तामर संयोजक बाबूलाल कासलीवाल एवं मनोज जैन बनेठा ने बताया कि शाम 7 बजे से भक्तामर दीपार्चना का आयोजन किया गया। इसमें प्रथम श्रेष्ठी परिवार कांता देवी, जिनेंद्र कुमार और अभिष कुमार सर्राफ (उनियारा) तथा द्वितीय मेवा देवी, उदित कुमार (शिवाड़) और गुरुवार भक्तामर मंडल बनेठा के सहयोग से भक्तामर दीपार्चना सानंद संपन्न हुई।